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Siberian Birds in Jharkhand : साइबेरियन पक्षियों से गुलजार हुआ झारखंड का ये इलाका

Siberian Birds in Jharkhand : जैसे ही ठंड का मौसम शुरू होता है, गढ़वा जिला एक खूबसूरत नजारे का गवाह बन जाता है. दूर साइबेरिया, मंगोलिया और मध्य एशिया के ठंडे इलाकों से प्रवासी साइबेरियन पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा करके यहां पहुंचते हैं. जिले के अन्नराज डैम, रमना प्रखंड के जिरूआ जलाशय और भवनाथपुर सेल डैम में इन दिनों इन पक्षियों की भरमार दिख रही है. सुबह की हल्की धूप और शाम की शांति में जब ये पक्षी झुंड बनाकर उड़ते हैं, तो दृश्य बेहद मनमोहक लगता है. पानी पर तैरते ये पक्षी प्रकृति प्रेमियों को खूब लुभाते हैं.

हर साल तीन महीने रहते हैं मेहमान

जानकारों के अनुसार, साइबेरियन पक्षी हर साल ठंड से बचने के लिए भारत के अपेक्षाकृत गर्म और सुरक्षित क्षेत्रों में आते हैं. गढ़वा जिले के जलाशयों में उन्हें पर्याप्त भोजन, शांत वातावरण और खुले जल क्षेत्र उपलब्ध हो जाते हैं. यहीं वजह है कि ये पक्षी लगभग तीन महीने तक यहां प्रवास करते हैं. फरवरी और मार्च के महीने में जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है, ये पक्षी वापस अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं.

पर्यावरण के लिए भी हैं महत्वपूर्ण

प्रवासी पक्षियों का आगमन केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. ये पक्षी जलाशयों की जैव विविधता को समृद्ध करते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में सहायक होते हैं. पर्यावरणविदों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों की नियमित उपस्थिति वहां के स्वस्थ पर्यावरण का संकेत होता है.

पर्यटन की अपार संभावनाएं

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन जलाशयों को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित किया जाये, तो गढ़वा जिला ‘बर्ड वॉचिंग’ के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है. प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से पर्यटक आ सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नये अवसर भी सृजित होंगे. पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने आम लोगों से अपील की है कि प्रवासी पक्षियों को किसी प्रकार की हानि न पहुंचायें. शिकार, तेज आवाज, प्लास्टिक कचरा और जल प्रदूषण जैसी गतिविधियां पक्षियों के लिए घातक साबित हो सकते हैं.

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