Gumla : पेसा नियमावली आदिवासी स्वशासन की दिशा में एक मजबूत कदम, बोले राजनील तिग्गा
Gumla : गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रगतिशील नेतृत्व में 23 दिसंबर को मंत्रिमंडल की बैठक में झारखंड पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार 2025 पेसा नियमावली को स्वीकृति मिलना राज्य के आदिवासी एवं ग्रामीण समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है. यह निर्णय सरकार के उस संकल्प को दर्शाता है. जिसमें चुनावी वादों को धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता दिखायी देती है. इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशानुसार गुरुवार को क्रिसमस पर गुमला जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा स्थानीय बिरसा मुंडा एग्रो पार्क में पेसा उत्सव का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों को बधाई दी गयी. जिला अध्यक्ष राजनील तिग्गा ने कहा कि पेसा नियमावली की स्वीकृति आदिवासी स्वशासन की दिशा में एक मजबूत कदम है. इससे ग्रामसभा को वास्तविक शक्ति मिलेगी और गांवों के विकास की दिशा व दशा अब गांव के लोग स्वयं तय करेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के पक्ष में रही है. यह फैसला उसी विचारधारा का परिणाम है. कांग्रेस नेता आशिक अंसारी ने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामसभा को स्कूल, अस्पताल, खनन, लघु वनोपज और जलसंसाधनों के उपयोग पर निर्णायक अधिकार मिलेगा. नप के पूर्व अध्यक्ष दीपनारायण उरांव ने कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा था. पेसा नियमावली की स्वीकृति से उस संघर्ष को सम्मान मिला है. उन्होंने कहा कि इस फैसले से ग्रामसभा को केंद्र में रखकर विकास की नई राह खुलेगी. सिमडेगा विधायक के प्रतिनिधि मनीष कुमार हिंदुस्तान ने कहा कि पेसा नियमावली केवल एक कानून नहीं. बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम है.
इससे स्थानीय संसाधनों का संरक्षण होगा और विकास का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलायेगी. मौके पर मानिकचंद साहू, अधिवक्ता अरुण कुमार, इकरामुल हक, फिरोज आलम, गुलाम सरवर, रोहित कुमार विक्की, साहेब वसीम, मो मिन्हाज, रामनिवास, शाहजहां अंसारी, मो मोख्तार, खुर्शीद आलम, शादाब अंसारी, लखन राम, रूपेश सन्नी कुमार, जय सिंह, सीता देवी, अरुण गुप्ता, रफी अली, सौरभ, गणेश राम, सगीर आलम, सैय्यद खालिद, राजा, ब्रजकिशोर उरांव, विजय उरांव, किशुन बड़ाइक आदि लोग उपस्थित थे.
