Missing Children in Gumla : गुमला के बच्चों के लापता होने का रहस्य
Missing Children in Gumla : गुमला शहर के जवाहर नगर से 30 मार्च 2008 को रहस्यमय ढंग से लापता हुए तीन स्कूली बच्चे आकाश राज उर्फ बाबू, पवन सोनी और शशांक शेखर उर्फ पपलू 18 साल बीतने के बाद भी नहीं मिले हैं. इस घटना ने न सिर्फ परिजनों को, बल्कि पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था. तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस, सीबीआइ और न्यायालय भी इस गुत्थी को सुलझाने में असफल रहे. ज्ञात हो कि 30 मार्च 2008 को तीनों बच्चे अपने-अपने घरों से साइकिल लेकर घूमने निकले थे. इसके बाद वे वापस नहीं लौटे. परिजनों ने पहले खुद बच्चों की तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला, तो गुमला थाना में कांड संख्या 86/2008 के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मंत्री, सांसद, विधायक व स्थानीय लोगों के दबाव में पुलिस ने जांच तेज की. अनुसंधान के दौरान रंथू, मेंटल, ललकू, रूपनाथ समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन बाद में सभी रिहा हो गये. इन गिरफ्तारियों के बावजूद बच्चों के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी. पुलिस ने बांसडीह गांव के एक कुएं से एक साइकिल बरामद की, जो तीनों में से एक बच्चे की बतायी गयी. साइकिल मिलने से उम्मीद जगी, लेकिन बच्चों का कोई पता नहीं चल सका.
हाइकोर्ट के आदेश पर सीबीआइ जांच, फिर भी नतीजा रहा शून्य
जब पुलिस बच्चों को खोजने में नाकाम रही, तो आकाश राज के पिता बलिराम पासवान ने झारखंड हाइकोर्ट का रुख किया. हाइकोर्ट ने तत्कालीन गुमला एसपी नरेंद्र कुमार सिंह को सशरीर उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दिया. पुलिस को समय दिये जाने के बाद भी जब सफलता नहीं मिली, तो मामला सीबीआइ को सौंपा गया. हाइकोर्ट ने सीबीआइ को तीन सितंबर 2012 तक बच्चों को खोजने का निर्देश दिया, लेकिन सीबीआइ भी इस मामले में कोई ठोस परिणाम नहीं दे सकी. अंततः जांच एजेंसी को केस बंद करना पड़ा.
पैसे भी गये, बच्चे भी नहीं मिले : बलिराम
आकाश राज के पिता बलिराम पासवान का कहना है कि यदि बच्चों के गायब होने के तुरंत बाद पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई की होती, तो शायद आज स्थिति अलग होती. उन्होंने बताया कि बच्चों के अपहरण का दावा करते हुए कुछ लोगों ने डेढ़ लाख रुपये की फिरौती मांगी थी. इसमें से 1.30 लाख रुपये अपहरणकर्ताओं को दिये गये, लेकिन न तो बच्चे लौटे और न ही पैसे वापस मिले. उस समय भी पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी. बलिराम पासवान कहते हैं कि उन्हें आज भी विश्वास है कि उनके बच्चे जहां भी होंगे, सुरक्षित होंगे. वे हर दिन ईश्वर से बच्चों की सकुशल वापसी की प्रार्थना करते हैं.
