धरोहर

1200 साल पुराना है रूद्रपुर के शिव मंदिर, विश्व धरोहर में शामिल करने की पहल

गुमला से 70 किमी दूर जारी प्रखंड के रूद्रपुर गांव स्थित करीब 1200 वर्ष पुराने ध्वस्त शिव मंदिरों और राजमहलों के अवशेषों पर अब शोध होगा. इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डॉक्टर नीरज कुमार मिश्र ने स्थल का दौरा कर सर्वेक्षण किया है.

डॉक्टर नीरज कुमार मिश्र रूद्रपुर गांव पहुंचे और जहां-जहां प्राचीन अवशेष मौजूद हैं. वहां की जानकारी लेकर प्रारंभिक सर्वेक्षण किया. स्थानीय बुजुर्ग व जानकारों के अनुसार प्राचीन काल में राजा रूद्रप्रताप सिंह जब इस क्षेत्र से गुजर रहे थे. तब यहां के प्राकृतिक सौंदर्य से प्रभावित होकर उन्होंने अपने सेनापतियों को यहां मंदिर और राजमहल निर्माण का आदेश दिया था. राजमहल और मंदिर बनकर तैयार भी हो गये थे. लेकिन बाद में जब मुगल बादशाह औरंगजेब इस मार्ग से गुजरे तो उनकी नजर इन मंदिरों और राजमहलों पर पड़ी.

इसके बाद उन्होंने अपने सैनिकों को इन्हें तोड़ने का आदेश दिया. जिसके बाद सभी मंदिर और राजमहल ध्वस्त कर दिये गये. इधर, सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीण जगत प्रसाद सिंह, पुरेंद्र सिंह आदि उपस्थित थे.

प्राचीन ईंट, पत्थर व मंदिर के अवशेष

आज भी रूद्रपुर गांव में प्राचीन ईंट, पत्थर और मंदिरों के अवशेष है जो उस ऐतिहासिक धरोहर की गवाही देते हैं. पुरातत्व विभाग के सर्वे से क्षेत्र के इतिहास को उजागर होने की उम्मीद जतायी जा रही है. गांव के लोगों को उम्मीद है कि यदि यहां पुरातत्व विभाग खुदाई का काम करती है तो ऐतिहासिक धरोहर सामने आयेंगे और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होता है तो गांव के दिन भी बहुरेंगे.

सर्वेक्षण रिपोर्ट सरकार को भेजी जायेगी : डॉक्टर नीरज

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डॉक्टर नीरज कुमार मिश्र ने बताया कि उपलब्ध संकेतों के अनुसार इन शिव मंदिरों का निर्माण लगभग 1200 वर्ष पूर्व शिव समाज के लोगों द्वारा कराया गया था. इस प्रकार के प्राचीन शिव मंदिर बहुत कम देखने को मिलते हैं. उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण की रिपोर्ट सरकार को भेजी जायेगी. उन्होंने कहा कि यहां वैज्ञानिक तरीके से खुदाई करायी जायेगी. कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष मिलने की संभावना है.

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