गुमला

वार्ड पार्षदों ने गुमला के रसूक नेता के खिलाफ खोला मोर्चा, नप बोर्ड के बहिष्कार की दी चेतावनी

गुमला नगर परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व 22 पार्षदों ने गुमला के रसूक नेता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पार्षदों का आरोप है. रसूक नेता नगर परिषद से निकाले गये टेंडर के काम को खुद करना चाहते हैं. जब टेंडर नहीं मिला तो वे गुमला शहर के विकास को बाधित करने में लगे हुए हैं. गुरुवार को नगर परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पार्षदों ने गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो से मिलकर लिखित आवेदन भी सौंपा है. जिसमें गुमला के रसूक नेता के खिलाफ शिकायत करते हुए कहा है कि अगर रसूक नेता का नगर परिषद पर इसी प्रकार दखल रहा तो वे नगर परिषद के बोर्ड का बहिष्कार करेंगे. बोर्ड की बैठक भी नहीं करेंगे और इसके जिम्मेवार खुद रसूक नेता व उसका साथ देने वाले लोग होंगे. इधर, उपायुक्त ने आवेदन मिलने के बाद मामले में हस्तक्षेप करने की बात कही है. जिससे गुमला शहर का विकास प्रभावित न हो.

रसूक नेता के कारण 32 योजनाएं प्रभावित

रसूक नेता के खिलाफ की गयी शिकायत के आवेदन में अध्यक्ष शकुंतला उरांव, उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी व सभी वार्ड के पार्षदों का हस्ताक्षर है. डीसी को दिये आवेदन में पार्षदों ने कहा है कि नगर परिषद, गुमला द्वारा आम नागरिक हित में कार्य कराना बोर्ड की संवैधानिक एवं कानूनी दायित्व है. इस कार्य को कराने के लिए नगर परिषद बोर्ड द्वारा समय-समय पर कार्यालय के कार्यपालक पदाधिकारी को जमीनी स्तर पर कार्य कराने हेतु बोर्ड द्वारा आदेश दिया जाता है. परंतु गुमला के कुछ प्रभावी व रसूक नेता/जनप्रतिनिधियों द्वारा कार्य में अनावश्यक रूप से व्यवधान उत्पन्न करते हुए विकास कार्यों को अवरोध किया जा रहा है. जबकि समस्त कार्य झारखंड सरकार द्वारा दिये गये निर्देशों व प्रक्रियाओं के अनुरूप पारदर्शी तरीके से एवं पूर्व से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही सम्पादन किया जा रहा है. चूंकि कुछ प्रभावी व रसूक नेता/जनप्रतिनिधियों के चहेते लोगों को नियम एवं कानून को ताक पर रखकर गलत तरीके से कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा आर्थिक लाभ नहीं दिया गया. इससे नाराज होकर निकाय बोर्ड द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति प्रदत्त नगर परिषद, गुमला के 32 योजनाओं को अवरोध करने की साजिश रचते हुए उक्त कार्यों को प्रभावित करने हेतु नगर परिषद कार्यालय एवं जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति के सदस्यों पर अनावश्यक रूप से दबाब बनाया जा रहा है.

विधायक को नप में चाहिए टेंडर : अध्यक्ष

अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने कहा है कि पूर्व में भी निकाय बोर्ड द्वारा पारित कार्यों पर रसूक नेता विधायक द्वारा अवरोध उत्पन्न किया जा चुका है. जबकि निकाय बोर्ड एक संवैधानिक संस्था है. संविधान में इसको विशेष दर्जा प्राप्त है. नगर परिषद द्वारा पूरे पारदर्शी के साथ टेंडर निकालकर काम कराया जा रहा है. लेकिन विधायक अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाने के लिए साजिश रचते हुए शहर के विकास को प्रभावित करने में लगे हैं. जब भी टेंडर निकला है. विधायक नगर परिषद में हावी होते रहे हैं. बेवजह के डीसी से विधायक ने शिकायत किया है. जबकि पूरे मामले की जांच हो तो स्पष्ट होगा कि टेंडर सरकार के नियम कानून के तहत हुआ है. लेकिन यहां विधायक अपना कानून चलाना चाहते हैं. जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे.

सभी पार्षद बोर्ड का बहिष्कार करेंगे : उपाध्यक्ष

उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने कहा है कि शहर के सभी वार्डों के नागरिकों को अपने-अपने वार्ड के जनप्रतिनिधियों व वार्ड पार्षदों से बहुत उम्मीद है. उसी उम्मीद की पूर्ति हेतु सभी पार्षदों द्वारा वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने वार्ड के अंतर्गत प्रथामिकता के आधार पर योजना दी गयी. जिसका क्रियान्वयन इ टेंडर के माध्यम से किया जा रहा है, जो कि पूर्णतः ऑनलाइन है. परंतु गुमला के रसूक नेता उक्त टेंडर को प्रभावित कर रहे हैं. उक्त कार्य को प्रभावित करने से जनता के उम्मीदों पर पानी फेर जायेगा एवं शहर का विकास का कार्य पूरी तरह से ठप रह जायेगा. यदि ऐसा होता है तो समस्त पार्षद बोर्ड का बहिष्कार करेंगे एवं बोर्ड की बैठक आहूत नहीं की जायेगी. जिसकी पूरी जिम्मेवारी सभी जिम्मेदार लोगों की होगी.

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