झारखंड ग्रामीण बैंक के दैनिक मजदूरों का चरणबद्ध आंदोलन सात जुलाई से, पांच अगस्त को हड़ताल पर रहेंगे
झारखंड ग्रामीण बैंक में कार्यरत दैनिक मजदूरों की 15 सूत्री मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से बैंक के दैनिक मजदूर संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है. संघ के महासचिव नवल किशोर वर्मा ने बैंक के अध्यक्ष (मुख्य नियोक्ता) तथा विभिन्न सुरक्षा एवं सेवा प्रदाता कंपनियों (नियोक्ता) को पत्र भेजकर आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की जानकारी दी है. नवल ने बताया कि 20 जून 2026 को 15 सूत्री मांग-पत्र सौंपा गया था. लेकिन 15 दिन बीत जाने के बावजूद न तो मांगों पर कोई जवाब मिला और न ही वार्ता के लिए कोई पहल की गयी. संघ का आरोप है कि बैंक प्रबंधन और संबंधित कंपनियां दैनिक मजदूरों की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील हैं तथा उनसे केवल काम लिया जा रहा है. जबकि उनका उचित अधिकार और पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बैंक की शाखाओं के संचालन में दैनिक मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका है. लेकिन उनकी मांगों की लगातार अनदेखी से उनमें असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है. ऐसे में आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.
चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा
संघ ने सात जुलाई से पांच अगस्त तक विभिन्न चरणों में आंदोलन चलाने की घोषणा की है. इसके तहत सात जुलाई को मांग दिवस मनाया जायेगा. 10 जुलाई को व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से मांगों के समर्थन में संदेश भेजे जायेंगे तथा 13 जुलाई से कर्मचारी अतिरिक्त सहयोग वापस लेकर केवल नियमानुसार कार्य करेंगे. इसके बाद 15 जुलाई को उप श्रमायुक्त धनबाद के समक्ष श्रम कानूनों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज करायी जायेगी. 16 जुलाई को विभिन्न संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से समर्थन मांगा जायेगा तथा 20 जुलाई को झारखंड ग्रामीण बैंक के प्रधान कार्यालय का घेराव, धरना और प्रदर्शन किया जायेगा. 21 जुलाई को हड़ताल का नोटिस जारी किया जायेगा. 25 जुलाई को प्रधानमंत्री, वित्त मंत्रालय और श्रम मंत्रालय को शिकायत भेजी जायेगी. 30 जुलाई को सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को ज्ञापन सौंपा जायेगा. 2 अगस्त को प्रेस वार्ता, 4 अगस्त को रांची में मशाल जुलूस तथा 5 अगस्त को एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल आयोजित की जायेगी.
ये हैं प्रमुख मांगें
संघ की 15 सूत्री मांगों में दैनिक मजदूरों का नियमितीकरण, कुशल मजदूर के अनुरूप मजदूरी, न्यूनतम 26 दिनों का भुगतान, निर्धारित कार्य घंटे, समय पर वेतन भुगतान, वेतन पर्ची, वर्दी, अवकाश, बोनस, भविष्य निधि (पीएफ) अंशदान, ईएसआईसी का लाभ, यात्रा व्यय की प्रतिपूर्ति, सामाजिक सुरक्षा, सेवा की गारंटी तथा एक ही कंपनी के अधीन प्रतिनियोजन सुनिश्चित करना शामिल है। संघ के महासचिव नवल किशोर वर्मा ने कहा कि यदि आंदोलन के दौरान भी बैंक प्रबंधन और नियोक्ता सकारात्मक पहल करते हैं तो संघ वार्ता के माध्यम से समाधान का स्वागत करेगा.
