कार्तिक बाबा शिक्षा के पुजारी थे, बोले जगरनाथ उरांव
आदिवासियों के मसीहा पंखराज साहेब स्वर्गीय कार्तिक उरांव की 101वीं जयंती पर सदर प्रखंड के बसुआ डीपाटोली में समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में डीपाटोली में स्थापित कार्तिक उरांव की प्रतिमा का अनावरण किया गया. मौके पर जनजातीय रीतिरिवाज से कार्तिक उरांव की पूजा की गयी. इस दौरान गांव में उल्लास का माहौल रहा. मौके पर समारोह के मुख्य अतिथि समाजसेवी जगरनाथ उरांव ने कहा कि कार्तिक बाबा की प्रतिमा आने वाली पीढ़ी का हमेशा प्रेरणा देती रहेगी.
उन्होंने समाज के लोगों से शिक्षित होने व रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया. कहा कि कार्तिक बाबा शिक्षा के पूजारी थे. वे चाहते थे कि समाज का हर व्यक्ति शिक्षित रहे. ताकि आने वाले समय में वे अपने हक व अधिकार को जान सके और शिक्षा के दम पर उसे प्राप्त कर सके. उन्होंने युवाओं से रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया. कहा कि रक्तदान महादान है. आपका रक्त किसी की जान बचा सकता है. इसलिए बेझिझक होकर रक्तदान करें. विशिष्ट अतिथि आईटीडीए निदेशक रांची संजय उरांव ने कहा कि स्वर्गीय कार्तिक उरांव आदिवासी समाज के मसीहा थे. वे आदिवासी समाज का एक महान चेहरा थे. जिन्होंने आदिवासी समाज के उत्थान व विकास के लिए पूरा जीवन काम किये. लेकिन आज भी उनके कई सपने अधूरे हैं. जिसे पूरा करना हम सबों की जिम्मेवारी है.
पूर्व बीएसएफ डीआईजी अमर एक्का ने कहा कि आदिवासी समाज की स्थिति अभी भी सुधरी नहीं है. इसके लिए हम सबों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है. पूर्व एसपी दिनेश उरांव ने शिक्षा के महत्व पर समाज के लोगों को जानकारी दी और शिक्षा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. पूर्व रेलवे अधिकारी मेधु उरांव व वीर बुद्धु भगत लुरकुड़िया के निदेशक संजीव भगत ने शिक्षा को परिवर्तन व उत्थान का हथियार बताया. सरना राजी पड़हा के जिलाध्यक्ष राजेश राम भगत ने समाज के लोगों को नशापान से दूर रहने के लिए प्रेरित किया. वहीं समारोह में बोकारो के ट्रेजरी ऑफिसर गुलाबचंद्र उरांव द्वारा गरीब महिला-पुरूषों के बीच कंबल व बच्चों के बीच पठन-पाठन सामग्री का वितरण किया गया. समारोह को सफल बनाने में रिटायर डीडीसी पुनई उरांव, कैप्टेन रामप्रसाद उरांव, बालेश्वर उरांव, दामोदर उरांव, चंपा उरांव, चारो उरांव सहित अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
