जब सिस्टम सोया, तो जनता जागी: गुमला में मोहल्लेवासियों ने खुद बनाई सड़क, पुलिया और नाली
गुमला: विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच गुमला शहर में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. नेता और अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बावजूद जब डुमरटोली से खड़ियापाड़ा जाने वाली पीसीसी सड़क की जर्जर पुलिया और क्षतिग्रस्त नाली की मरम्मत नहीं हुई, तो आखिरकार मोहल्ले के लोगों ने खुद फावड़ा और कुदाल उठा लिया. लोगों ने श्रमदान कर सड़क, पुलिया और नाली की मरम्मत कर मिसाल पेश की.
डुमरटोली और खड़ियापाड़ा को जोड़ने वाला यह मार्ग लंबे समय से बदहाल था. टूटे नाले और जर्जर पुलिया के कारण स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मरम्मत की मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला.
आखिरकार मोहल्लेवासियों ने यह तय किया कि अब सरकारी मदद का इंतजार नहीं करेंगे. सभी ने आपसी सहयोग और श्रमदान से पुलिया, नाली और सड़क की मरम्मत का काम पूरा किया. इसके बाद इस रास्ते पर आवागमन फिर से सुचारू हो गया.
इस श्रमदान अभियान में मिखाईल लकड़ा, पात्रिक किंडो, खुश माईन तिर्की, जेम्स अनिल एक्का, रेजिश पॉल एक्का, अमित मिंज, आनंद एक्का, समीर खलखो, आनंद लकड़ा, बहादुर टोप्पो समेत कई स्थानीय लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
यह घटना एक ओर मोहल्लेवासियों की एकजुटता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है, तो दूसरी ओर यह सवाल भी छोड़ जाती है कि जब जनता अपने टैक्स के पैसे से बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद करती है, तब क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ आश्वासन देने तक ही सीमित रह गई है? आखिर लोगों को अपनी सड़क और पुलिया खुद क्यों बनानी पड़ रही है?
