संस्कृति

सिसई : जहां हाथी ने शुरू की थी शिवभक्ति, पोटरो के बूढ़ा महादेव की अनसुनी कहानी

सिसई प्रखंड मुख्यालय से महज तीन किमी दूर बाइपास में पोटरो गांव स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर आस्था, लोकविश्वास और रहस्य का अद्भुत संगम है. सावन का महीना शुरू होते ही यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती है. दूरदराज से भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू हैं. जिसका इतिहास इतना प्राचीन है कि इसकी स्थापना कब हुई. इसका कोई प्रमाण किसी के पास नहीं है. बताया जाता है कि सर्वप्रथम एक जंगली हाथी महादेव का पहला भक्त बना था. बूढ़ा महादेव मंदिर से जुड़ी यह जनश्रुति आज भी लोगों को रोमांचित कर देती है.

बुजुर्ग बताते हैं कि वर्षों पहले यह पूरा इलाका घने जंगल और वीरान भूमि से घिरा हुआ था. उसी दौरान एक जंगली हाथी प्रतिदिन एक स्थान पर जाकर रुकता था. कहा जाता है कि उपेक्षित पड़े स्वयंभू शिवलिंग को वह अपनी सूंड से उखाड़कर कहीं और ले जाने का प्रयास करता रहा. लेकिन सफल नहीं हो सका. इसके बाद हाथी ने वहीं अपना डेरा जमा लिया. गांव में हाथी की मौजूदगी से लोगों में भय का माहौल था. लेकिन उसकी एक अजीब दिनचर्या ने ग्रामीणों की जिज्ञासा बढ़ा दी. हाथी प्रतिदिन पास के तालाब से अपनी सूंड में पानी भरकर एक निश्चित स्थान पर जाता और काफी देर तक वहीं ठहरता था. जिसपर ग्रामीणों ने छिपकर हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी. तब उन्हें घनी झाड़ियों के बीच एक शिवलिंग दिखायी दिया.

सातवें दिन कुछ ग्रामीण साहस जुटाकर जल अर्पित करने पहुंचे. लोककथा के अनुसार हाथी ने भी श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल चढ़ाया और शांतिपूर्वक जंगल की ओर चला गया. इसके बाद ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ उस स्थान की साफ-सफाई कर नियमित पूजा-अर्चना शुरू की और शिवलिंग का नाम बूढ़ा महादेव रखा. सावन के पावन महीने में बूढ़ा महादेव मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि लोक आस्था, इतिहास और ग्रामीण संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुका है. हाथी और शिवलिंग की यह अनोखी कथा आज भी श्रद्धालुओं के मन में अटूट विश्वास जगाती है और हर वर्ष हजारों भक्तों को यहां खींच लाती है.

पीढ़ियों से पहान परिवार निभा रहा सेवा का दायित्व

पोटरो गांव का पहान परिवार मंदिर की देखरेख और पूजा-अर्चना का दायित्व निभाता आ रहा है. वर्तमान में परिवार की बुजुर्ग महिला नीलिमा देवी मंदिर की मुख्य पुजारी हैं. उनका कहना है कि वह वर्षों से महादेव की सेवा कर रही हैं. जब वह विवाह कर आयी थी. तब उनके परदादा ससुर शिवलिंग की देख रेख करते थे.

महादेव के आशीर्वाद से विधायक बनने की भी है मान्यता

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर के समीप ही पूर्व सांसद स्वर्गीय ललित उरांव का पैतृक आवास था. वे उन्ही की पूजा-अर्चना कर नॉमिनेशन भरने गये थे. ग्रामीणों का विश्वास है कि बूढ़ा महादेव के आशीर्वाद से ही वे वर्ष 1969 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए.

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