संस्कृति

गुमला : गढ़सारू पहाड़ के गुफा में है प्राचीन शिवलिंग, यहां से जुड़ी है कई कहानी

गढ़सारू पहाड़ के गुफा में प्राचीन शिवलिंग है. यहां से कई प्राचीन कहानी जुड़ी हुई है. इसलिए, यहां दिल से मांगी मुराद पूरी होती है. सावन माह में यहां भक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं. गुमला शहर से तीन किमी की दूरी पर गढ़सारू पहाड़ है. गढ़सारू तक पक्की सड़क है. लेकिन, पहाड़ पर स्थित शिवलिंग गुफा तक जाने के लिए आधा किमी कच्ची पहाड़ी सड़क है. परंतु, यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. कहा जाता है, सैंकड़ों साल पहले यहां गुफा में शिवलिंग निकला था.

इसके बाद से यहां पूजा हो रही है. हालांकि, पहाड़ पर गुफा में शिवलिंग होने व जंगल के कारण लंबे समय तक यह शिवलिंग भक्तों की नजरों से ओझल रहा. कुछ ही लोग यहां पूजा करते थे. परंतु, जैसे जैसे भक्तों को यह पता चला कि गढ़सारू पहाड़ के गुफा में शिवलिंग है. लोग अब यहां हर साल सावन माह में पूजा करने पहुंच रहे हैं. इस वर्ष भारी बारिश के बीच भी यहां भक्तों की भीड़ देखी जा रही है. गुफा के बाहर में एक बड़े शिवलिंग का निर्माण सुरेश फोगला द्वारा कराया गया है. चूंकि, गुफा के अंदर में शिवलिंग है. इसलिए किसी श्रद्धालू को जलाभिषेक करने में परेशानी न हो. इसके लिए गुफा के समीप सुंदर शिवलिंग बनाया गया है.

शिवलिंग के समीप हिल जैसा दृश्य

जिस गुफा में शिवलिंग है. वहां पास का नजारा हिल जैसा है. पहाड़ पर चढ़ने से गुमला शहर नजर आता है. रात को इस पहाड़‍ से गुमला शहर सबसे सुंदर दिखती है. क्योंकि, रात को गुमला शहर में जब बिजली जलती है तो इसकी खूबसूरती बढ़ा देती है.

सालोंभर झरना से पानी गिरता है

पहाड़ में एक झरना है. जहां से सालोंभर पानी गिरता है. यह पानी पहाड़ के रास्ते गिरते हुए आधा किमी दूर एक डाड़ी कुआं में जाकर मिलता है. इसलिए इस डाड़ी कुआं का पानी कभी नहीं सूखता है. अगर झरना को सुंदर बनाया जाये तो यह आकर्षक होगा.

पहाड़ में अनगिनत बंदर व मोर है

गढ़सारू पहाड़ जहां शिवलिंग गुफा है. वहां आसपास अनगिनत बंदर है. मोर भी है. स्थानीय लोग बताते हैं कि मोर यहां अक्सर दिखता है. परंतु, लोगों की भीड़ को देखकर मोर घने जंगल में भाग जाता है. जबकि बंदर गुफा के पास आकर डेरा जमाये रहते हैं.

पर्यटन विभाग से विकास करने की मांग

गढ़सारू पहाड़ को पर्यटन विभाग गुमला से विकास करने की मांग किया गया है. सुरेश फोगला ने कहा है कि अगर प्रशासन थोड़ा भी ध्यान दे दें तो यह गुमला शहर का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल होगा. चूंकि, शहर के बीच पहाड़ के गुफा में शिवलिंग है जो रांची के पहाड़ी मंदिर की तर्ज पर है.

आधा दर्जन से अधिक बेल के पेड़ है

यहां सबसे अच्छी बात यह है कि शिवलिंग गुफा के समीप आधा दर्जन से अधिक बेल के पेड़ है. जिस कारण यहां श्रद्धालुओं को भगवान के चरणों में बेल का पत्र चढ़ाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है. यह पहला शिवलिंग है. जहां बेल के अधिक पेड़ है.

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