अंजुमन इस्लामिया गुमला : फर्जी चुनाव कमेटी बनाने का आरोप, सौहार्द बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग
अंजुमन इस्लामिया गुमला के संविधान में समय-समय पर किए गए संशोधनों और आगामी चुनाव को लेकर विवाद सामने आया है. मामले में अनुमंडल पदाधिकारी, गुमला को आवेदन देकर एक व्यक्ति पर गैर-संवैधानिक तरीके से चुनाव कमेटी बनाने, व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आपसी सौहार्द बिगाड़ने तथा अपमानजनक और उन्माद फैलाने वाले संदेश प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है. आवेदन में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है.
आवेदन में अंजुमन इस्लामिया के संविधान में हुए संशोधनों का क्रमवार उल्लेख किया गया है. इसके अनुसार वर्ष 1995 के संविधान में वर्ष 2007 में पूर्व सदर खलील अशरफी और पूर्व सेक्रेटरी खुर्शीद आलम के कार्यकाल में संशोधन किया गया था. इसके बाद वर्ष 2018 में पूर्व सदर इरशाद खान और पूर्व सेक्रेटरी खुर्शीद आलम के कार्यकाल में 2007 के संशोधित संविधान को निरस्त कर नया संविधान बनाया गया.
आवेदन के अनुसार वर्ष 2018 के संविधान में पहली बार नाजिम-ए-आला का पद शामिल किया गया और तत्कालीन अंजुमन की कार्यकारी समिति एवं पंचायतों की सहमति से खलील अशरफी को बिना चुनाव नाजिम-ए-आला बनाया गया. आरोप है कि वर्ष 2023 में अंजुमन इस्लामिया का चुनाव 1995 या 2007 के संविधान के आधार पर नहीं, बल्कि 2018 के संशोधित संविधान के अनुसार कराया गया था.
आवेदन में आगे कहा गया है कि वर्ष 2023 के चुनाव के बाद मौजूदा सदर, सेक्रेटरी और नाजिम-ए-आला की सहमति से संविधान में संशोधन का प्रस्ताव पारित हुआ. इसके बाद पंचायतों के सदर और कार्यकारिणी समिति की सहमति से 2018 के संविधान को निरस्त कर वर्ष 2024 का संशोधित संविधान बनाया गया. इसी संशोधन में अंजुमन के कार्यकाल को पांच वर्ष किया गया तथा नाजिम-ए-आला के पद को समाप्त कर दिया गया.
आवेदनकर्ता का कहना है कि अंजुमन इस्लामिया के चुनाव और चुनाव कमेटी के गठन की घोषणा करने का अधिकार संविधान के अनुसार तत्कालीन अंजुमन के सेक्रेटरी को है. इसके बावजूद मुर्शिद हनीफ, थाना रोड, गुमला निवासी पर गैर-संवैधानिक तरीके से चुनाव कमेटी के गठन एवं गतिविधियां संचालित करने का आरोप लगाया गया है.
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अपमानजनक एवं उन्माद फैलाने वाली बातें प्रसारित की जा रही हैं, जिससे समाज में गुटबाजी बढ़ने और आपसी सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है. आवेदनकर्ता ने एसडीओ से मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.
