GI टैग से बढ़ा गुमला के मांदर का मान, विधायक भूषण तिर्की बोले- मिली नई पहचान
मांदर को जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) मिलने पर गुमला विधानसभा के विधायक भूषण तिर्की ने इसे गुमला जिले के लिए गौरव का विषय बताया. उन्होंने कहा कि मांदर को मिली यह पहचान गुमला ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है. इससे जिले के पारंपरिक वाद्य यंत्र और इसे बनाने वाले स्थानीय कलाकारों को नई पहचान और ख्याति मिलेगी.
विधायक ने कहा कि रायडीह प्रखंड के जरजट्टा गांव में पारंपरिक रूप से मांदर बनाने का काम होता रहा है. इस गांव के कारीगरों और स्थानीय कलाकारों की पीढ़ियों से चली आ रही कला ने मांदर को अलग पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आज यही मांदर झारखंड की लोक संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा बनकर देश-दुनिया में पहचान बना रहा है. उन्होंने कहा कि मांदर को जीआई टैग दिलाने की दिशा में गुमला प्रशासन और स्थानीय कलाकारों के प्रयास सराहनीय हैं. इसके लिए उन्होंने प्रशासन और मांदर बनाने वाले सभी कारीगरों को बधाई दी. विधायक ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार द्वारा स्थानीय कला, संस्कृति और पारंपरिक वाद्य यंत्रों को पहचान दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
भूषण तिर्की ने कहा है कि गुमला में स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ प्राचीन परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण पर भी काम किया जा रहा है. मांदर को मिली नई पहचान से स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार और बाजार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. आने वाले समय में गुमला के कलाकारों और पारंपरिक कला को और मजबूत करने के लिए कई पहल किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि जिले की समृद्ध लोक संस्कृति और कलाकारों की प्रतिभा को व्यापक मंच दिलाने का प्रयास जारी रहेगा.
