गुमला

Naxal Surrender : गुमला में जेजेएमपी का सफाया, सुप्रीमो ब्रजेश यादव ने किया सरेंडर

Naxal Surrender : पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन जेजेएमपी के सुप्रीमो ब्रजेश यादव ने सरेंडर कर दिया है. उसपर पांच लाख रुपये का इनाम भी है. ब्रजेश गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड स्थित कठठोकवा गांव का रहने वाला है. वह जुलाई माह में खुद को सुप्रीमो घोषित किया था. परंतु, ब्रजेश के सुप्रीमो बनते ही पुलिस ने जेजेएमपी के कई उग्रवादियों को मुठभेड़ में मार गिराये थे. जिससे ब्रजेश यादव डर गया और अपनी सुरक्षा के लिए वह पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. हालांकि, ब्रजेश के सरेंडर करने की जानकारी पुलिस नहीं दे रही है. गुमला के एक अधिकारी ने कहा कि ब्रजेश यादव ने गुमला में सरेंडर नहीं किया है. वह लातेहार जिला की पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है. संभावत: दो-तीन दिन के अंदर उसे मीडिया के सामने प्रस्तुत कर जेल भेज दिया जायेगा. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ब्रजेश यादव के सरेंडर किये दो दिन हो गया है. ब्रजेश के सरेंडर करने के बाद पुलिस उसे लेकर कई उग्रवादी ठिकानों पर छापामारी कर रही है.

पुलिस से डरा हुआ था ब्रजेश

यहां बता दें कि गुमला में तीन महीने के अंदर जेजेएमपी के कई हार्डकोर उग्रवादी पुलिस मुठभेड़ में मारे गये हैं. गुमला में उग्रवादियों के मारे जाने के बाद जेजेएमपी के पूर्व सुप्रीमो रविंद्र यादव ने अपने पूरे दस्ते के साथ लातेहार में सरेंडर कर दिया था. इसके बाद गुमला के बिशुनपुर निवासी सबजोनल कमांडर ब्रजेश यादव ने जुलाई माह में खुद को जेजेएमपी का सुप्रीमो घोषित कर दिया था. परंतु, पुलिस के दबिश के बाद ब्रजेश भी सरेंडर कर दिया.

गुमला में जेजेएमपी का सफाया

लातेहार जिला में ब्रजेश यादव के सरेंडर करने के बाद गुमला जिले में जेजेएमपी का सफाया हो गया है. क्योंकि, घाघरा में लगातार हुए दो मुठभेड़ में जेजेएमपी के उग्रवादियों के मारे जाने के बाद ब्रजेश यादव अपने दो-चार साथियों के साथ गुमला जिले में बच गया था. परंतु, अब ब्रजेश भी सरेंडर कर दिया. इस कारण गुमला से जेजेएमपी का सफाया हो गया. सिर्फ लातेहार जिला में सबजोनल कमांडर शिवा सिंह उर्फ शिवाजी व रामदेव लोहरा का दस्ता बच गया है. शिवा के दस्ते में छह सात जेजेएमपी के सदस्य बचे हैं. अगर शिवा का दस्ता खत्म हुआ तो गुमला, लातेहार, सिमडेगा, पलामू व लोहरदगा से जेजेएमपी का सफाया हो जायेगा. क्योंकि, इसके बाद जेजेएमपी का कोई बड़ा नेता नहीं बचेगा.

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