Gumla : गुमला के इस गांव के लाल ने पाकिस्तान में घुसकर बंकर किये थे नष्ट
Gumla : गुमला से 70 किमी की दूरी पर जारी गांव है. आज जारी गांव को प्रखंड का दर्जा प्राप्त है. यह इलाका छत्तीसगढ़ राज्य से सटा हुआ है और जंगल व पहाड़ों के बीच बसा है. कई ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे जारी गांव के लोगों ने कभी नहीं यह सोचा था कि एक दिन इस गांव में अलबर्ट एक्का जैसे वीर पुत्र का जन्म होगा जो आगे चलकर देश की रक्षा के लिए खुद की शहादत देकर इस गांव को एक अलग पहचान दे जायेगा. जारी गांव में जन्मे अलबर्ट एक्का ने पाकिस्तान में घुसकर बंकर नष्ट किये थे और पाकिस्तानी दुश्मनों को मार गिराया था.
अलबर्ट एक्का के आदम्य साहस के कारण ही 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को शिकस्त दी थी. इस युद्ध में तीन दिसंबर 1971 को अलबर्ट एक्का शहीद हुए थे. मरणोपरांत उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था. भारत-पाक युद्ध की कहानी के अनुसार 1971 के युद्ध में गंगासागर के समीप 15 भारतीय सैनिकों को मरता देख अलबर्ट एक्का दौड़ते हुए बंदर की तरह टॉप टावर के उपर चढ़ गये थे. उसके बाद टॉप टावर के मशीनगन को अपने कब्जे में लेकर दुश्मनों को तहस नहस कर दिये थे. इस दौरान उसे 20 से 25 गोलियां लगी थी. पूरा शरीर गोलियों से छलनी था. वे टॉप टावर से नीचे गिर गये. जहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी.
बताया जाता है कि 20 वर्ष की उम्र में अलबर्ट ने 1962 ईस्वी में चीन के विरुद्ध युद्ध में अपनी बुद्धि व बहादुरी का लोहा मनवाया था. उसके बाद 1968 में बलमदीना एक्का से उनका विवाह हुआ. बलमदीना से शादी के बाद 1969 में एक पुत्र हुआ. जिनका नाम भिंसेंट एक्का है. अलबर्ट एक्का 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिये. जहां दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे.
सैनिक स्कूल की मांग अधूरी
देश के लिए जान देने वाले शहीद अलबर्ट एक्का के नाम से गांव में सैनिक स्कूल खोलने की मांग अबतक अधूरी है. जिस कारण सेना में जाने वाले युवा उपेक्षित हैं. यहां के लोगों ने सैनिक स्कूल खोलने की मांग की है. ताकि जारी प्रखंड के युवा यहां पढ़ लिखकर सेना में जा सके.
संग्रहालय बनाने की मांग की
पूर्वोतर भारत में शहीद अलबर्ट एक्का एकमात्र परमवीर चक्र विजेता हैं. इसलिए लोगों की लंबे समय से मांग है. जारी प्रखंड मुख्यालय में शहीद के नाम पर संग्रहालय बने. जहां शहीद की वीरता की कहानी लिखी हो. जिसे आने वाली युवा पीढ़ी पढ़कर व जानकर देश सेवा के पथ पर आगे बढ़ सके.
हॉकी के खिलाड़ी थे, निशानेबाज भी थे
अलबर्ट एक्का हॉकी खेल के एक अच्छे खिलाड़ी थे. जब वे अपने दोस्तों के साथ हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेते थे तो जीत सुनिश्चित रहती थी. जीत भी ऐसी कि एक दिन पूरे गांव में जश्न मनता था. इसके साथ ही वे एक अच्छे निशानेबाज भी थे. चिड़ियां को गुलेल से मारकर गिरा देते थे. अलबर्ट एक्का के दोस्त जारी गांव निवासी दिलबोध बड़ाइक बतातें हैं कि हॉकी खेल में उनका कोई सानी नहीं था. एतवा बड़ाइक ने बताया कि अलबर्ट एक्का की निशानेबाजी भी अच्छी थी. वे गुलेल से चिड़िया को एक बार में ही मार गिराते थे.
