संस्कृति

Gumla: पालकोट के सर्वशक्तिमान मां दशभुजी की रोचक कहानी

Gumla: पालकोट प्रखंड के देवो के गांव देवगांव है. इस कथा में आज हम सर्वशक्तिमान मां दशभुजी की बात करेंगे. मां दशभुजी वर्तमान समय में पालकोट प्रखंड मुख्यालय स्थित मंदिर में बिराजमान है. परंतु, मां दशभुजी पालकोट कैसे पहुंची इसके पीछे रोचक कहानी है. ढाई सौ साल पहले मां दशभुजी देवगांव के गुफा में बिराजमान थी. ढाई सौ साल पहले इस क्षेत्र में नागवंशी राजाओं का शासन था. कहा जाता है कि नागवंशी राजा क्षेत्र भ्रमण में जब देवगांव गुफा पहुंचे तो यहां गुफा के अंदर मां दशभुजी की मूर्ति बिराजमान मिली. वे पूजा पाठ किये. इससे मां दशभुजी खुश हो गयी. कहा जाता है कि मां दशभुजी चमत्कारी ढंग से नागवंशी राजा की गोद में चली गयी. इसके बाद नागवंशी राजा ने मां दशभुजी को हाथी व घोड़े के साथ पालकोट लेकर पहुंचे और यहां छोटा मंदिर बनाकर उसी मंदिर में मां दशभुजी की मूर्ति को स्थापित कर दिया. मां दशभुजी की मूर्ति आज भी पालकोट प्रखंड मुख्यालय के मंदिर में बिराजमन है और मां दशभुजी की मूर्ति हर समय चमक बिखेरते रहती है.

1765 ईश्वी में भव्य रूप से हुई थी मां दशभुजी की पूजा

देवगांव के पुजारी डमरू बाबा ने बताया कि मां दशभुजी को देवगांव से पालकोट लाने के बाद ही इस क्षेत्र में मां की पूजा की शुरूआत हुई थी. नागवंशी महाराजा यदुनाथ शाह ने 1765 में सर्वप्रथम इस क्षेत्र में मां दशभुजी की भव्य पूजा किये थे. यदुनाथ के बाद उनके वंशज विश्वनाथ शाह, उदयनाथ शाह, श्यामसुंदर शाह, बेलीराम शाह, मुनीनाथ शाह, धृतनाथ शाहदेव, देवनाथ शाहदेव, गोविंद शाहदेव व जगरनाथ शाहदेव ने इस परंपरा को बरकरार रखा. उस समय मां दशभुजी मंदिर के समीप भैंस की बली देने की प्रथा थी. परंतु जब कंदर्पनाथ शाहदेव राजा बने, तो उन्होंने बली प्रथा समाप्त कर दी. कहा जाता है कि मां दशभुजी से दिल से मांगी गयी मुराद पूरी होती है.

गुफा में मूर्ति के रूप में मां दशभुजी खुद प्रकट हुई

देवगांव मंडाधाम के अध्यक्ष सूरजदेव सिंह ने कहा है कि पालकोट में आज जो मां दशभुजी की मूर्ति स्थापित है. पहले यह देवगांव में था. परंतु, जब नागवंशी राजा देवगांव घूमने गये तो मां दशभुजी उनके साथ खुद पालकोट आ गयी. पूरे लाव-लश्कर के साथ मां को पालकोट लाया गया था. हालांकि, देवगांव गुफा से मां दशभुजी के पालकोट आने के बाद एक और मूर्ति वहां खुद प्रकट हुई जो आज भी देवगांव गुफा में बिराजमान है. जहां पूरी श्रद्धा के साथ लोग पूजा पाठ करते हैं.

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