Tourist Places in Gumla : नये साल में बाघमुंडा जलप्रपात आएं, खूबसूरती मोह लेगी मन को
Tourist Places in Gumla : झारखंड के बसिया प्रखंड में स्थित बघमुंडा जलप्रपात अब नए रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक यहां आ सकें. इसके लिए लगभग 2 करोड़ 44 लाख रुपये की योजना तैयार की गई है. इस बजट से कुल 26 तरह के विकास कार्य किए जाएंगे, जिससे यहां घूमने और मनोरंजन की बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी. अभी बघमुंडा सी-श्रेणी के पर्यटन स्थल के रूप में दर्ज है, लेकिन गुमला जिला पर्यटन विभाग ने इसे बी-श्रेणी में शामिल करने की मांग की है, ताकि इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके.
बाघमुंडा जंगल, नदी और पहाड़ों के बीच बसा एक खूबसूरत स्थान है, जिसकी प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है. यह पिकनिक स्पॉट के रूप में काफी लोकप्रिय है और पूरे साल लोग यहां घूमने आते हैं. बाघमुंडा जलप्रपात के पास 26 तरह के विकास कार्य किए जाएंगे, जिनमें वॉच टावर, सेल्फी प्वाइंट, सेल्फी जोन, पार्किंग एरिया, प्रवेश द्वार और सोलर लाइट शामिल हैं. इन सुविधाओं के बाद पर्यटक यहां और भी आराम से घूम सकेंगे और सुंदर नज़ारों की तस्वीरें आसानी से ले पाएंगे. वॉच टावर के लिए जगह भी तय कर ली गई है.
वॉच टावर से बाघमुंडा जलप्रपात की मनोरम दृश्य व आसपास के जंगलों की खूबसूरती को देख सकेंगे. बाघमुंडा जलप्रपात में उतरने वाली सीढ़ी में रेलिंग का निर्माण किया जायेगा. अभी सीढ़ी में रेलिंग नहीं होने से पर्यटकों को परेशानी व असुरक्षा महसूस होती है. इसके अलावा जगह-जगह पर सूचना बोर्ड लगेगा, जिसमें बाघमुंडा में किस तरफ घूमने जाये और किस तरफ नहीं जाये. इसकी जानकारी सूचना बोर्ड में रहेगी.
सालों भर यहां पर आते हैं पर्यटक
बाघमुंडा में नदी की तेज धारा और तीन दिशाओं से गिरने वाला पानी सिर्फ बरसात में दिखता है, लेकिन इसकी प्राकृतिक बनावट लोगों को पूरे साल आकर्षित करती है. गर्मी हो, सर्दी हो या बारिश—यहां हमेशा सैलानियों की भीड़ रहती है, जबकि अभी यहां सुविधाएं कम हैं. इसके प्रवेश द्वार पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर, रास्ते में महादेव कोना और पास का धनसिंह टोला जलाशय—इन तीनों को जोड़कर एक तरह का गोल्डन ट्राइएंगल बनता है. यह जगह प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण भविष्य में एक बड़ा पर्यटन स्थल बन सकती है.
कैसे नाम पड़ा बाघमुंडा
बाघमुंडा जलप्रपात कोयल नदी के बड़े-बड़े पत्थरों के बीच से गुजरते हुए सात धाराओं में बंट जाता है और तीन दिशाओं में बहता है. पत्थरों के इस ढेर में एक पत्थर बाघ के सिर जैसा दिखता है.पानी इसी पत्थर से टकराकर नीचे गिरता है। इसी वजह से इस जगह का नाम बाघमुंडा पड़ा.
