यात्रा

Gumla Tourist Places : सिसई के नगर गांव में 314 साल पहले नागवंशी राजा द्वारा बनवाया गया बावली गढ़ मिला

Gumla Tourist Places : गुमला के सिसई प्रखंड स्थित नगर गांव में 314 साल पहले नागवंशी राजा द्वारा बनवाये गये बावली गढ़ मिला है. बावली गढ़ जर्जर हो गया था. ध्वस्त हो रहा था. परंतु, कुछ माह पहले पुरातत्व विभाग ने इसकी मरम्मत करायी. प्राचीन धरोहर बावली गढ़ की मरम्मत के बाद यह अब सुरक्षित है. यहां अभी भी करीब 40 फीट का कुआं है. जिसमें करीब 35 फीट तक सीढ़ी बनी हुई है. सीढ़ी के सहारे कुआं में आसानी से उतरा जा सकता है. साथ ही कुआं से सटे नागवंशी राजा राम साह के मंत्री का निवास स्थान है. एक मंदिर भी है. जहां 314 साल पहले शिवलिंग हुआ करता था जो अब नहीं है.

यहां बता दें कि मुगल साम्राज्य से बचने के लिए नागवंशी राजा दुर्जन साह ने नवरत्नगढ़ की स्थापना किये थे. कहा जाता है कि दुर्जन शाह की चौथी पीढ़ी राम साह कला प्रेमी थे. जिन्होंने नवरत्नगढ़ से करीब एक किमी की दूरी पर बावली गढ़ की स्थापना किये थे. साथ ही बावली गढ़ के समीप मंत्री का निवास स्थान सहित मंदिर का निर्माण किया गया था. कलांतर में जब नागवंशी राजा नवरत्नगढ़ छोड़कर पालकोट गढ़ गये तो यहां वीरान हो गया. जिसके कारण बावली गढ़ के मंदिर, कुआं सहित मंत्री निवास स्थान ध्वस्त होने के कगार पर हो गया. चारों ओर झाड़ी उग आया था. झाड़ियों के कारण यह बावली गढ़ भी ढक गया था. जिसे एक साल पहले पुरातत्व विभाग ने खोज निकाला. इसके बाद इसका अनुसंधान किया गया तो यह नवरत्नगढ़ का हिस्सा मिला. यहां कई प्राचीन कलाकृतियां भी हैं. साथ ही पुराने समय में लिखा हुआ शिलापटट भी है. जिसमें 1711 ईस्वी में बावली गढ़ बनाने का प्रमाण है. आज यह पुरातत्व विभाग विश्व धरोहर का एक अंग बन गया है. पुरातत्व विभाग ने इसे सुरक्षित करने का प्रयास किया है.

नागवंशी साम्राज्य की महिलाएं कुएं में उतरकर पानी भरती थी

कहा जाता है कि अक्सर रानी व मंत्री की पत्नी सहित नागवंशी साम्राज्य की जो महिलाएं थी. यहां बावली में पानी भरते थे. इस पानी का उपयोग पीने के लिए होता था. इसके अलावा यहां जो प्राचीन शिवलिंब था. उसपर इसी बावली से पानी लेकर जलाभिषेक करते थे. कुएं में आसानी से उतरा व चढ़ा जा सकता है. लेकिन लंबे समय से वीरान रहने के कारण वर्तमान समय में लोग कुएं में कम उतरते हैं.

1711 में राम साह ने बनवाये थे : दामोदर

नगर गांव के समाज सेवी दामोदर सिंह ने कहा है कि प्राचीन कपिलनाथ मंदिर जाने के रास्ते पर बावली गढ़ है. यहां काफी गहरा कुआं है. जिसमें सीढ़ी बनी हुई है. शिलापटट के अनुसार इसे 1711 ईस्वी में राम साह ने बनवाये थे. वर्षो तक यह गुमनाम रहा. परंतु, अब यह सुंदर जगह बन गया है. पर्यटकों व इतिहासकारों के लिए यह सुंदर जगह है.

बावली का अर्थ

ग्रामीणों ने बताया कि बावली या बावड़ी का अर्थ है सीढ़ियों वाला कुआं या छोटा तालाब है जो पानी तक पहुंचने का रास्ता है. कुआं में नीचे उतरने वाली सीढ़ियों वाला एक चौड़े मुंह वाला जलाशय होता है. प्राचीन काल में इस बावली का उपयोग पानी भरने और विश्राम के लिए किया जाता था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *