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French Tourists in Gumla : फ्रांस के टूरिस्ट पहुंचे गुमला, सारू पहाड़ का किया अवलोकन

French Tourists in Gumla : गुमला शहर से सटे सारू पहाड़ को देखने व यहां की प्रकृतिक बनावट को जानने फ्रांस के टूरिस्ट पहुंचे. इस पहाड़ से उरांव आदिवासी समुदाय के फागुन त्योहार से लोक कथा जुड़ी हुई है. वे फागुन त्योहार के बारे में जानकारी हासिल की. वे उरांव समुदाय के पारंपरिक रीति रिवाज, खान-पान, परब त्योहार, नृत्य गीत आदि देखने एवं जानकारी हासिल की. सबसे पहले गढ़सारू गांव के लोगों ने पारंपरिक रीतिरिवाज से स्वागत कर अखाड़ा में ले गये. वहां उनका पैर धोकर आदर सत्कार किया और आदिवासी गमछा देकर सम्मानित किया गया. इसके पश्चात पारंपरिक व्यंजन उन्हें दिया गया जो कि उन्हें बहुत पसंद आया. तत्पश्चात वे करौंदा लिटाटोली गांव में स्व कार्तिक उरांव की जंयती समारोह एवं जतरा में शामिल हुए. उरांव समुदाय के सृष्टि स्थल सिरा-सीता नाले ककड़ोलाता, धरम कण्डो, धरम कुड़िया, ढकनी चुआं आदि का भ्रमण किये. तत्पश्चात पुनः काटासारू गांव गये. वहां भी उन्हें आदिवासी पारंपरिक रीतिरिवाज से स्वागत किया गया.

प्रोफेसर तेतरू उरांव ने बताया कि फ्रांस की टूरिस्टों ने सारू पहाड़, फागुन त्योहार से संबंधित कई जानकारी प्राप्त की. वहां के लोग उन्हें बहुत पसंद आये. मड़ुवा रोटी, चेंच सुकटी, चाकोड़ सुकटी, गेठी कान्दा, हड़िया के अलावा कई सब्जी का सेवन किया जो उन्हें बहुत पसंद आया. इसके पश्चात वे मांदर निर्माण कला देखा. इन टूरिस्टों की अगुवाई कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला के सहायक प्राध्यापक डॉ तेतरु उरांव एवं कुड़ुख भाषा के शोधार्थी शिवशंकर उरांव ने की जो धुमकुड़िया के मेंबर हैं. साथ में कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला के प्रो अजीत कुमार हांसदा, प्रो प्रेमचंद उरांव, सुखमनी तिग्गा, बोडरा उरांव थे. एक नवंबर को टूरिस्ट नेतरहाट के असुर जनजाति के बारे में जानकारी प्राप्त करने जायेंगे.

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