Gumla Chamber Elections : दो उम्मीदवारों का नामांकन रद्द, मैदान में बचे 21 उम्मीदवार
Gumla Chamber Elections : गुमला चेंबर ऑफ कॉमर्स के आम चुनाव 2026 हेतु नामांकन पत्रों की जांच रविवार को चेंबर कार्यालय में हुई. मुख्य चुनाव पदाधिकारी अमित माहेश्वरी व सहायक चुनाव पदाधिकारियों ने 23 प्रत्याशियों द्वारा दर्ज किये गये नामांकन पत्रों का वीडियो कैमरा की देखरेख व निगरानी में जांच किया. जांच में दो नामांकन पत्र गलत भरे हुए पाये गये. जिनके नामांकन रदद कर दिया गया. जिसमें गुलाम सरवर व अमर कुजूर हैं. गलत भरे हुए नामांकन पत्रों में कई जगह त्रुटियां थी. परंतु सबसे बड़ी गलती की उन दोनों प्रत्याशियों ने किस टीम लीडर के समर्थन में अपना नामांकन पत्र भरा है. उसमें भी अपना नाम अंकित कर दिया है. जबकि किसी भी टीम हेतू चेंबर संविधान के अनुसार टीम में 11 न्यूनतम प्रत्याशी का होना अनिवार्य है. परंतु दोनों ने अपना अपना ही नाम टीम लीडर के समर्थन वाले कॉलम में भरा है.
साथ ही साथ निर्दलीय में भी चुनाव चिन्ह अंकित किया हुआ मिला. टीम लीडर की सहमति वाले कॉलम में टीम लीडर का हस्ताक्षर नहीं है. इन्ही त्रुटियों को देखते हुए दो नामांकन पत्र रद्द कर दिये गये. इससे पूर्व चुनाव पर्यंवेक्षक व वैसे सहायक चुनाव पदाधिकारी जो आज अपने किसी व्यक्तिगत कार्य से कार्यालय नहीं आ पाये थे. उनसे मुख्य चुनाव पदाधिकारी द्वारा सहमति ले ली गयी थी की उनका नामांकन पत्र जांच में जो भी निर्णय होगा वह मान्य होगा. इस तरह चुनाव में 21 प्रत्याशी ही सही व वैध पाये गये. पांच जनवरी को नाम वापसी का समय है. मौके पर मुख्य चुनाव पदाधिकारी अमित महेश्वरी, सहित सहायक चुनाव पदाधिकारी हिमांशु केशरी, दिनेश अग्रवाल, राजेश कुमार सिंह उपस्थित थे.
राजेश लोहानी का अध्यक्ष बनना तय
चुनाव मैदान में अब सिर्फ 21 उम्मीदवार है. जबकि चेंबर को चलाने के लिए 21 कार्यकारिणी सदस्यों की जरूरत पड़ती है. इसमें राजेश लोहानी के नेतृत्व में जिन सदस्यों ने नामांकन पत्र भरा था. उसमें सभी का नामांकन पत्र सही पाये गये. इसलिए अब राजेश लोहानी का अध्यक्ष बनना तय है. चूंकि, चुनाव मैदाल में 21 उम्मीदवार हैं. इसलिए अब वोटिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी. सभी 21 उम्मीदवार विजय घोषित होंगे. बस अब मुख्य चुनाव पदाधकारी द्वारा उम्मीदवारों को विजय घोषित करने की औपचारिकता बची हुई है. यहां बता दें कि अगर वोटिंग नहीं होता है तो चेंबर का लाखों रुपये बचेगा. क्योंकि, वोटिंग में चेंबर का लाखों रुपये खर्च होता है. इधर, कुछ चुनावों से देखा जा रहा है कि अब सर्वसम्मति से चेंबर के अध्यक्ष का चयन करने की परिपाटी शुरू हो गयी है.
