गुमला

Gumla : मंत्री व सचिव से मिलेंगे संवेदक, कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट जायेंगे

Gumla : नगर परिषद गुमला ने 1.44 करोड़ रुपये के टेंडर में भाग लेने से संवेदकों का मामला गरमा गया है. संवेदकों ने नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. शनिवार को सभी संवेदक एक बार पुन: नगर परिषद कार्यालय के बाहर जुटे. जहां टेंडर में संवेदकों को भाग लेने से रोकने के मामले में चर्चा की गयी. साथ ही संवेदकों ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले को लेकर नगर विकास विभाग झारखंड सरकार के मंत्री व नगर विकास विभाग के सचिव से रांची जाकर गुमला के संवेदक मुलाकात करेंगे. गुमला प्रशासक व सिटी मैनेजर के खिलाफ शिकायत करते हुए गुमला से हटाने की मांग की जायेगी. मंत्री व सचिव के स्तर से अगर कार्रवाई नहीं होती है तो हाईकोर्ट जायेंगे. टेंडर मामले में प्रशासक व सिटी मैनेजर के खिलाफ केस किया जायेगा. हाईकोर्ट में केस करने के लिए सभी संवेदक पैसा चंदा करेंगे.

संवेदकों ने कहा है कि पूर्व में भी एसीए मद के भुगतान को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. अब नगर परिषद के खिलाफ संवेदक हाईकोर्ट की शरण लेंगे. आजसू पार्टी के जिला महामंत्री सह संवेदक आनंद कुमार गुप्ता ने कहा है कि नगर परिषद गुमला में मनमौजी काम हो रहा है. प्रशासक व सिटी मैनेजर अपने हिसाब से हर एक योजना की सेटिंग गेटिंग करते हैं. जिसका खमियाजा यहां के संवेदकों को भुगतना पड़ रहा है. यहां सेटिंग करके एक-दो संवेदकों को सभी योजना का लाभ दिया जाता है. श्री गुप्ता ने कहा है कि इस मामले को लेकर गुमला उपायुक्त से नौ जनवरी को ही लिखित शिकायत की गयी है. लेकिन अब तक नगर परिषद के मामले में कार्रवाई नहीं हुई. न ही टेंडर रदद कर दोबारा निविदा निकालने की प्रक्रिया की गयी है. इसलिए मजबूर अब संवेदक बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं. उन्होंने कहा कि गुमला के विकास के लिए संवेदक हर समय लगे रहते हैं. लेकिन कई ऐसे संवेदक हैं. जिनकी पहुंच बड़े नेताओं तक नहीं है. उन्हें टेंडर नहीं मिलता है. लेकिन जिन संवेदकों की पहुंच बड़े नेता व प्रशासक के बीच जी-हुजूरी की है. उन्हें तुरंत टेंडर मिल जाता है. परंतु अब नगर परिषद में टेंडर के इस धांधली को चलने नहीं दिया जायेगा.

प्रशासक व सिटी मैनेजर के कॉल डिटेल की जांच हो : भोला

युवा समाज सेवी भोला चौधरी ने कहा है कि नौ जनवरी को नगर परिषद में 17 ग्रुप की योजनाओं के लिए विपत्र की बिक्री व जमा करने की तिथि तय थी. परंतु, निर्धारित समय दिन के तीन बजे तक न तो विपत्र बेचा गया और न ही विपत्र जमा लिया गया. संवेदक जब विपत्र लेने विभाग पहुंचे तो वहां से नगर परिषद के लोग गायब हो गये. यह जांच का विषय है. साथ ही किसके इशारे पर नगर परिषद के प्रशासक व सिटी मैनेजर ने टेंडर में भाग लेने के लिए संवेदकों को रोका है. इसकी जांच के लिए प्रशासक व सिटी मैनेजर के मोबाइल का कॉल डिटेल की भी जांच हो. उन्होंने कहा है कि शुरू से ही नगर परिषद में टेंडर घोटाला व टेंडर मैनेज का खेल होते रहा है. यह गुमला के वैसे संवेदकों के साथ धोखा है जो विकास के कामों में लगे रहते हैं. गुमला उपायुक्त से मांग है. इस मामले को गंभीरता से लिया जाये.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *