Gumla : मां बेटे की हत्या के तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा
Gumla : गुमला के हर्रा अंबाकोना गांव में 15 मई 2011 को हुए दिल दहला देने वाली दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. एडीजे-थ्री भूपेश कुमार की अदालत ने मीरा तिग्गा, युजीन तिग्गा और सीप्रियन तिग्गा को मां-बेटे की निर्मम हत्या का दोषी करार दिया. वहीं सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत तीनों दोषियों को उम्रकैद के साथ 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है. जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतनी होगी. वहीं धारा 201/34 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में दो वर्ष का कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दो महीने का साधारण कारावास अतिरिक्त रूप से भुगतनी होगी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुधीर कुमार टोप्पो ने प्रभावी पैरवी की. अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह साबित हुआ कि भूमि विवाद के कारण आरोपियों ने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था. प्राथमिकी के अनुसार, घटना के दिन हर्रा अंबाकोना निवासी विनोद कुजूर और उसकी मां अगुस्तीना कुजूर पर टांगी से ताबड़तोड़ हमला किया गया था. हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी थी. दोहरे हत्याकांड को छिपाने के इरादे से आरोपियों ने मां-बेटे के शव को लकड़ियों से शव को जला दिया था. घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गयी थी. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि मृतक विनोद कुजूर के पक्ष में कुछ दिन पूर्व जमीन की डिग्री हुई थी. इसी बात से नाराज होकर आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत हत्या की वारदात को अंजाम दिया. जांच के दौरान पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाये. जिसके आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया था. करीब 15 वर्षों तक चले इस बहुचर्चित मामले में आखिरकार न्यायालय के फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.
