Guru Nanak Jayanti : गुमला में उत्साह से मनाया गया प्रकाश पर्व
Guru Nanak Jayanti : गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर गुमला शहर में पूरे सप्ताह भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का वातावरण बना रहा. पांच दिनों तक प्रभातफेरी और नगर कीर्तन से शहर “वाहे गुरु” के जयकारों से गूंजता रहा. गुरु पर्व के अवसर पर बुधवार को गुमला शहर के जशपुर रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा गुमला में विशेष पाठ, शब्द-कीर्तन दरबार और गुरु का लंगर आयोजित किया गया. जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया. दिलदार सिंह ने कहा कि भारत पाकिस्तान विभाजन के उपरांत जनजातीय बहुल क्षेत्र गुमला में आये कुछ सिख परिवार यहां के लोगों के सरल और आत्मीय व्यवहार से यहीं के होकर रह गये और स्थानीय समाज के साथ मिलजुलकर रहते हुए आज भी अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं.
भक्ति-भाव से शब्द-कीर्तन प्रस्तुत
भाई जरनैल सिंह के नेतृत्व में गुरुद्वारे में पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी ढोलक की थाप पर भक्ति-भाव से शब्द-कीर्तन गाते नजर आये. संगत ने गुरु-वाणी का श्रवण किया और लंगर में गुरु प्रसाद ग्रहण किया. गुरुद्वारे में आयोजित सामूहिक गुरु के लंगर में सभी जाति और धर्म के लोगों ने एक साथ एक पंक्ति में बैठकर लंगर ग्रहण किया तथा समानता और सामाजिक समरसता का सुंदर संदेश दिया. गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अनुसार पांच दिनों तक प्रभात फेरियां शहर के विभिन्न मार्गों से निकाली गयी. इसके बाद जशपुर रोड गुरुद्वारा से पालकोट रोड गुरुद्वारा तक विशाल नगर कीर्तन निकाला गया. जिसमें सजायी गयी पालकी साहिब के साथ कीर्तन जत्थे और सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए.
नाम जपना, कीरत करना और वंड छकना
गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा के प्रधान सरदार जगजीत सिंह ने बताया कि प्रकाश पर्व का मुख्य आयोजन बुधवार को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ. गुरुद्वारा के संरक्षक सरदार महेंद्र सिंह सचदेव, सचिव सरदार रंजीत सिंह, गुरु गोविंद सिंह फाउंडेशन के अध्यक्ष जसबीर सिंह प्रिंस, गगनदीप सिंह रज्जी ने प्रभातफेरी और नगर कीर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. गुरुद्वारे के पाठी जरनैल सिंह ने बताया कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को पंजाब के तलवंडी (अब ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों और ऊंच-नीच की भावना का विरोध करते हुए समानता, सेवा, सत्य और प्रेम का संदेश दिया. उनके उपदेश “नाम जपना, कीरत करना और वंड छकना” आज भी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत हैं.
ईश्वर एक है और वह सभी में विद्यमान है : दिलदार
दिलदार सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने सिखाया कि ईश्वर एक है और वह सभी में विद्यमान है. मेहनत, ईमानदारी और जरूरतमंदों की सहायता करना ही सच्ची पूजा है. उनके विचार आज भी समाज को एकता, मानवता और शांति का मार्ग दिखाते हैं. आज के आयोजन में सरदार महेंद्र सिंह, सरदार रंजीत सिंह, जसबीर सिंह प्रिंस, गगनदीप सिंह रज्जी, सरदार गुरविंदर सिंह, सरदार मनोहर सिंह, सरदार दिलदार सिंह, प्रीतपाल सिंह, प्रीतम सिंह, अमरजीत सिंह, सिमरजीत सिंह, कमलेश कौर, रविंद्र कौर, जसवंत कौर, कमलजीत कौर, कंवलजीत कौर, चरणजीत कौर, तरनजोत कौर, हेमा कौर समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे. पूरे दिन गुरु वाणी, सेवा और समानता की भावना से ओत-प्रोत माहौल रहा. जिससे गुमला शहर में श्रद्धा, शांति और भक्ति का अनोखा संगम दिखायी दिया.
गुरु नानक देव जी मानवता के मार्गदर्शक : रंजीत
रंजीत सिंह सरदार ने कहा कि संत-महात्मा समाज को सत्य, प्रेम और करुणा का मार्ग दिखाने ईश्वर के दूत बनकर आते हैं. ऐसे ही दिव्य पुरुष थे श्रीगुरु नानक देव जी, जिन्होंने अपने उपदेशों से मानवता को नई दिशा दी. उन्होंने कहा “हुकमे अंदर सबको, बाहर हुकम न कोय”, अर्थात सृष्टि ईश्वर की आज्ञा से चलती है और जो इसे समझ लेता है. उसका अहंकार मिट जाता है. गुरु नानक देव जी ने कर्म, सत्य और दया को जीवन का आधार माना. “सच बरत संतोख तीरथ गिआन धियान स्नान”. उन्होंने जाति, धर्म और भेदभाव का विरोध करते हुए मानव समानता का संदेश दिया.“सा जात सा पात है, जेहे करम कमाए।” उनके साथी एक हिंदू (भाई बाला) और एक मुस्लिम (भाई मरदाना) थे जो उनके सार्वभौमिक दृष्टिकोण का प्रतीक हैं. नारी सम्मान पर उन्होंने कहा “सो क्यों मंदा आखीऐ जित जमें राजान”. वहीं अन्याय के विरोध में वे निडर स्वर बने. “पाप दी जज लै क़ाबुलों आया, जोरी मंगै दान. मानवता, समानता और सत्य के इस युगनायक गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर कोटिशः नमन.
