Makar Sankranti : गुमला में 300 साल पुरानी है रथयात्रा मेला की परंपरा जीवित, मकर संक्रांति पर लगता है मेला
Makar Sankranti : जनजातीय बहुल गुमला जिले में मकर संक्रांति के अवसर पर नागफेनी में रथयात्रा मेला लगाने की 300 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवित है. नागवंशी राजाओं के समय से चली आ रही परंपरा का निर्वाहन आज भी किया जाता है. सिसई प्रखंड के नागफेनी दक्षिणी कोयल नदी तट के किनारे रथयात्रा मेला का आयोजन जायेगा. लोग कोयल नदी में स्नान करेंगे. चूड़ा, गुड़, तिल, दही का सेवन करेंगे. भगवान की पूजा की जायेगी. रथ खीचेंगे. यहां 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ आती है. नागफेनी में भगवान जगरनाथ महाप्रभु, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा मूर्ति है. जहां पूजा अर्चना की जायेगी. तीन बजे भगवान सूर्य (मकरध्वज) की प्रतिमा को गर्भगृह से निकलकर रथ पर सवार कराकर रथयात्रा निकाली जाती है.
मेला शुरू होने की प्राचीन परंपरा
1700 ईस्वी में नागवंशी राजा उस समय अपनी शक्ति व राज्य विस्तार के लिए मेला लगाते थे. कलांतर में यह मेला का रूप धारण कर लिया. नागवंशी राजाओं द्वारा शुरू की गयी मेला की परंपरा आज बृहत रूप ले लिया है. यही वजह है कि जनजातीय बहुल गुमला जिले में मेला लगाने की प्राचीन परंपरा है. गुमला में लोगों का विश्वास भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के प्रति है. मकर संक्रांति के अवसर पर लोग नागफेनी व हीरादह नदी में डुबकी लगाने के साथ भगवान की जरूर पूजा करते हैं.
बैलगाड़ी से लोग मेला आते थे
गुमला में आज से 40 वर्ष पहले घोड़ा गाड़ी व बैलगाड़ी की परंपरा थी. उससे लोग मेला आते थे. 50 से 100 किमी की दूरी पर रहने वाले लोग एक या फिर दो दिन पहले मेला के लिए निकलते थे. लेकिन अब समय बदल गया है. इस हाईटेक युग में मोटर गाड़ी है. इसलिए आने जाने का साधन सुगम हुआ. लेकिन मेला का महत्व आज भी वर्षों पुराना है.
मेला का सामाजिक महत्व
गुमला में मकर संक्रांति पर लगने वाले मेला का सामाजिक महत्व इस मायने में है कि शादी ब्याह, परिजनों से मिलन व विचारों का आदान प्रदान होता है. इस दिन दूर दराज के लोग मेला देखने पहुंचते हैं. गांव की परंपरा के अनुसार शादी विवाह के लिए मेला में लड़का लड़की देखा देखी होता है. अगर पसंद आ गया, तो तिथि तय कर शादी की रस्म निभायी जाती है. वहीं दूर दराज के रिश्तेदार मेला में आते हैं. जहां घर व परिवार के कुशल मंगल के बारे में पूछा जाता है. संदेश के रूप में मिठाई का आदान प्रदान किया जाता है. रथयात्रा मेला का महत्व गांव के लोगों के लिए काफी मायने रखता है. इसी परंपरा के तहत मेले में लोगों की भीड़ दूर दूर से आती है.
