गुमला

Gumla: गुमला के 24 रेफरियों का 87 हजार रुपये बकाया, शिक्षा विभाग पैसा दबाकर बैठा हुआ है

Gumla: गुमला जिले के 24 रेफरियों का पैसा शिक्षा विभाग गुमला दबाकर बैठा हुआ है. जिले के 24 रेफरी का 87 हजार रुपये विभाग के पास बकाया है. गुमला में 2025 के जुलाई माह में सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता हुई है. इन सभी मैचों में रेफरियों द्वारा निर्णायकों की भूमिका निभायी गयी थी. प्रतियोगिता संपन्न हुए पांच माह हो गया. परंतु, प्रतियोगिता को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले रेफरी का मानदेय अबतक भुगतान नहीं हुआ है. जबकि मैच खत्म होने ही सभी रेफरी को प्रति मैच के हिसाब से मानदेय देने की बात हुई थी. इस संबंध में रेफरी एसोसिएशन गुमला ने उपायुक्त को लिखित ज्ञापन सौंपा है. जिसमें सभी रेफरी का नाम है. साथ ही किन किन मैचों के लिए किस रेफरी का कितना मानदेय बकाया है. उसकी पूरी सूची उपलब्ध करायी गयी है.

प्रति रेफरी हरेक मैच के लिए सात सौ रुपये देना था

रेफरी एसोसिएशन गुमला के सचिव जॉन वेस्ली मिंज ने कहा है कि गुमला में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल अंतर्गत प्रमंडल स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता 2025 का आयोजन सात जुलाई से 11 जुलाई तक हुआ था. जिसमें अंडर-17 बालक एवं बालिका एवं अंडर-15 बालक की टीमों के प्रतिभागी भाग लिये थे. यह मैच गुमला के तीन मैदानों में खेला गया था. जिसमें पहला जुबली स्टेडियम संत इग्नासियुस उच्च विद्यालय गुमला, दूसरा स्पोटर्स हॉस्टल बी ग्राउंड संत इग्नासियुस उच्च विद्यालय गुमला एवं तीसरा संत पात्रिक उच्च विद्यालय गुमला का मैदान शामिल है. इन तीनों खेल मैदानों के लिए शिक्षा विभाग गुमला द्वारा जिला रेफरी संघ से पत्र के माध्यम से निर्णायकों की मांग की गयी थी. शिक्षा विभाग की मांग पर प्रतियोगिता के सफल संचालन हेतु 24 निर्णायकों की पोस्टिंग की गयी थी. जिसमें जिला के बाहर से भी निर्णायकों को बुलाया गया था. जिला रेफरी संघ के द्वारा सभी निर्णायकों के ठहराव और भोजन के साथ ही साथ प्रत्येक दिन सात सौ रुपये मानदेय निर्धारित किया गया था. जिसमें बाहर से आये निर्णायकों को उनके आने जाने का गाड़ी का किराया भी देना था. शिक्षा विभाग द्वारा निर्णायकों के इन शर्तों पर सहमति भी प्रदान की गयी थी. प्रतियोगिता को समाप्त हुए अब पांच माह बीते जाने के बाद भी आज तक निर्णायकों के लिए फंड उपलब्ध होने के बावजूद उनका मानदेय नहीं मिला है.

रेफरियों का पैसा शिक्षा विभाग दबाकर बैठा हुआ है

रेफरी संघ ने कहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा पुनः जिला रेफरी संघ से दिनांक 15 एवं 16 नवंबर 2025 को एसजीएफआइ के अंडर-19 बालक और बालिका के मैच के लिए यह कहकर निर्णायकों की मांग की गयी थी कि निर्णायकों का सभी प्रतियोगिता का मानदेय का भुगतान दशहरा से पहले तक कर दिया जायेगा. लेकिन दशहरा पर्व भी समाप्त हो चुका है और अभी तक निर्णायकों का मानदेय नहीं मिला है. जबकि झारखंड के सभी जिलों में रेफरियों के मानदेय का भुगतान समय पर कर दिया गया है. सिर्फ गुमला जिला में पिछले पांच माह से जिला रेफरी संघ को धोखे में रखकर शिक्षा विभाग अपनी प्रतियोगिता संपन्न करा लेती है और रेफरियों का मानदेय नहीं दिया जाता है.

शिक्षा विभाग की प्रतियोगिता का करेंगे बहिष्कार

गुमला जिले के जितने रेफरी हैं. सभी गरीब परिवार से संबंध रखते हैं. वे अपना समय निकालकर प्रतियोगिता को संपन्न कराते हैं. यदि उनका मानदेय उन्हें दिया जाता है तो इससे वे अपने जरूरतें पूरी नहीं कर सकते हैं. सचिव जॉन वेस्ली मिंज ने कहा है कि सचिव होने के नाते मेरे पास रेफरियों का फोन आता है. जिसमें एक रेफरी का पैर फ्रैक्चर हो गया है. एक की मां की तबीयत ठीक नहीं है. कुछ रेफरी रेन्ट में रहते हैं. यह पैसे उनके काम आ सकता है. इसलिए जिला शिक्षा विभाग से मेरे रेफरियों के मानदेय का भुगतान यथाशीघ्र करवाने की कृपा की जाये. अन्यथा भविष्य में जिला रेफरी संघ गुमला द्वारा शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित किसी भी प्रकार की प्रतियोगिता में अपना सहयोग नहीं दे पायेंगे.

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