Gumla : ग्रीन जोन का विरोध, फिर प्रशासन से लड़ाई, लाठी खाकर भी नहीं झुके थे
Gumla : इतिहास गवाह है. जहां जनहित के मुददों को लेकर आंदोलन हुआ है. उसका परिणाम सुखद रहा है. ग्रीन जोन का विरोध हुआ. फिर प्रशासन से लड़ाई हुई. लाठी खायी. थाना का चक्कर लगानी पड़ी. डीसी दरबार तक पहुंचा मामला. नगर परिषद ने गरीब सब्जी दुकानदारों को झुकाने का पूरा प्रयास किया. यहां तक कि जिस जगह से रोजी रोटी चलती थी. उस जगह को प्रशासन ने जेसीबी चलाकर गडढा खोद दिया. इसके बाद भी गरीब सब्जी दुकानदार नहीं हारे. न ही झुके. एक साल के आंदोलन के बाद आज पुन: अस्थायी सब्जी दुकान गरीब दुकानदारों को मिल गयी. जनता की यह जीत नगर परिषद गुमला की अध्यक्ष शकुंतला उरांव की पहल से मिली है.
साथ ही जनता के लिए मुखर होकर आवाज बुलंद करने वाले नगर परिषद के उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी का साथ भी गरीब दुकानदारों को मिला. जिस प्रकार प्रशासन ने जेसीबी लगाकर सब्जी दुकानों को खोद कर गडढा कर दिया था. ठीक उसी तर्ज पर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने अपने पद व पावर का उपयोग करते हुए उक्त गडढों को जेसीबी से मिटटी भरकर समतल कर दिया. जिससे अब दोबारा यहां सब्जी विक्रेता दुकानें लगाकर अपनी जीविका चला सके. यहां बता दें कि गुमला शहर के जशपुर रोड में बंगाली क्लब है. वहीं पास पीडब्ल्यूडी विभाग की दीवार है. जहां वर्षो से अस्थायी सब्जी दुकानें लगते रही है. इस सब्जी दुकानों से करीब 100 लोगों का जीविका चलता है. परंतु, गुमला शहर को सुंदर व उक्त स्थन को ग्रीन जोन बनाने का बहाना बनाकर नगर परिषद ने वहां जेसीबी चलाकर गडढा कर दिया. जिस कारण यहां सब्जी दुकानें लगनी बंद हो गयी.
गरीब किसान इधर उधर भटकने लगे. दुकान लगे. इसके लिए लोगों ने डीसी से लेकर विधायक व कई नेताओं के दरवाजे तक पहुंचे. लेकिन कहीं से उन्हें राहत नहीं मिली. इधर, जब नगर परिषद के चुनाव के बाद जब शकुंतला उरांव अध्यक्ष बनी तो उन्होंने जनता से किये वादे को पूरा करते हुए पहला कार्य उक्त गडढे को भरवा दिया. इससे लोगों में खुशी है. दर्जनों लोग अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के कार्यो से खुश होकर उन्हें मुंह मीठा कराया. साथ ही जनता के हित में इसी प्रकार काम करते की अपील की.
