Gumla : कम आयु में विवाह एक दंडनीय अपराध
Gumla : जिला समाज कल्याण विभाग गुमला द्वारा बाल विवाह उन्मूलन हेतु गुरुवार को केओ कॉलेज सभागार गुमला में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला हुआ. कार्यक्रम में 800 से भी अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों व नागरिकों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उदघाटन डीडीसी दिलेश्वर महतो, डालसा सचिव रामकुमार लाल गुप्ता, सदर एसडीओ राजीव नीरज, बसिया एसडीओ जयवंती देवगम, चैनपुर एसडीओ, डीएसडब्ल्यूओ आरती कुमारी, त्रिभुवन शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया. डीडीसी दिलेश्वर महतो ने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत लड़कियों की 18 वर्ष व लड़कों की 21 वर्ष से कम आयु में विवाह कराना एक संज्ञेय व दंडनीय अपराध है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह के आयोजनों में शामिल होने, सहायता करने या प्रोत्साहित करने वालों पर भी कानूनन कार्रवाई की जायेगी. डीडीसी ने विशेष रूप से बच्चियों को इस विषय में जागरूक होने, बाल विवाह नहीं करने व किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकारों की रक्षा करने हेतु सशक्त बनने की बात कही. डालसा सचिव रामकुमार लाल गुप्ता ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. बाल विवाह किशोरावस्था में गर्भधारण, कुपोषण, घरेलू हिंसा व शिक्षा बाधित होने जैसे खतरों को बढ़ाता है.
त्वरित कार्रवाई करते हुए बाल विवाह को रूकवाया जायेगा
उन्होंने कहा कि यदि कहीं बाल विवाह कराया जा रहा हो तो हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल कर जानकारी दी. जानकारी देने वाले का नाम गुप्त रखा जायेगा और त्वरित कार्रवाई करते हुए बाल विवाह को रूकवाया जायेगा. उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि कानून बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखता है और न्याय व्यवस्था सदैव उनके साथ है. इससे पूर्व डीएसडब्ल्यूओ आरती कुमारी ने कार्यक्रम के उद्देश्य से सभी उपस्थित जनों को अवगत कराया. उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य व विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. इसे रोकने हेतु सामाजिक व प्रशासनिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है. जिला प्रशासन द्वारा बाल विवाह रोकथाम को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. जिसका लक्ष्य जिले को पूर्णत: बाल विवाह मुक्त घोषित करना है. इस कार्य में शिक्षकों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों व युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित की जा रही है. वहीं कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को बाल विवाह नहीं करने की शपथ दिलायी गयी.
