सात साल से गायब संजीता कुमारी का सच क्या अब आयेगा सामने?
झारखंड के चर्चित संजीता कुमारी के गायब होने और कथित मानव तस्करी मामले में अब जांच एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गयी है. जिस पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है. सात साल से गायब संजीता का सुराग तलाश रही पुलिस अब मुख्य आरोपी भुखली उरांव उर्फ भुखली लकड़ा के संभावित नार्को टेस्ट की तैयारी में जुट गयी है. इसी कड़ी में 30 मई को आरोपी भुखली उरांव को रांची के रिनपास ले जाया जायेगा. जहां उसके मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी परीक्षण किये जायेंगे. पुलिस प्रशासन की टीम भुखली उरांव को अपने साथ लेकर रिनपास जायेगी. वहां विशेषज्ञ डॉक्टर यह जांच करेंगे कि 72 वर्षीय भुखली उरांव की मानसिक स्थिति नार्को टेस्ट के लिए उपयुक्त है या नहीं. जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे अदालत में प्रस्तुत किया जायेगा. जिसके आधार पर आगे नार्को टेस्ट कराने को लेकर निर्णय लिया जायेगा.
नार्को टेस्ट के लिए परिवार की सहमति
भुखली उरांव के संभावित नार्को टेस्ट को लेकर उसके परिजनों ने भी सहमति दे दी है. भुखली के परिजनों ने बताया कि संजीता कुमारी के लापता होने के बाद जब से मामला दर्ज हुआ है. तब से परिवार लगातार पुलिस अनुसंधान, पूछताछ और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजर रहा है. लंबे समय से चल रही जांच और बढ़ते दबाव के बीच अब परिवार भी चाहता है कि मामले का सच सामने आये और जांच किसी निष्कर्ष तक पहुंचे.
सदर अस्पताल में नहीं हो पायी जांच
इससे पहले गुरुवार को भुखली उरांव को गुमला सदर अस्पताल लाया गया था. लेकिन वहां आवश्यक मशीनों और तकनीकी सुविधाओं के अभाव में जांच संभव नहीं हो सकी. इसके बाद डॉक्टरों ने उसे रिनपास रेफर कर दिया. अब रिनपास की मेडिकल रिपोर्ट इस पूरे मामले में बेहद अहम मानी जा रही है.
सात साल से गायब है संजीता
मामले की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी. जब खोरा जामटोली निवासी चंद्रमुनी उरांव ने आरोप लगाया था कि गांव की ही भुखली उरांव उसकी नाबालिग बेटी संजीता कुमारी को पढ़ाई और काम दिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले गयी थी. इसके बाद बच्ची कभी वापस नहीं लौटी. परिजनों का आरोप है कि बेटी को वापस लाने की कोशिश करने पर उनके साथ मारपीट की गयी और धमकाकर भगा दिया गया. बाद में एएचटीयू गुमला थाना कांड संख्या 03/2020, दिनांक 6 फरवरी 2020 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई. लेकिन लंबे समय तक जांच धीमी गति से चलती रही.
