संस्कृति

जतरा में रोग व पाप से मुक्ति और गांव की खुशहाली के लिए पूजा की गयी

गुमला के सदर प्रखंड के डुंबरडीह पंचायत अंतर्गत जिलिंगा गांव में शुक्रवार को पनु जतरा का आयोजन किया गया. प्रत्येक वर्ष बुढ़िया करम पञ्चो करम के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस पनु जतरा की मान्यता है कि इसके आयोजन और पूजा-पाठ से गांव और गांव के लोगों रोग व पाप से मुक्त रहते हैं. वहीं जनता में गांव के पहान गरुड़ पहान द्वारा गांव की गांव को रोग व पाप से मुक्त रखने, गांव में खुशहाली और अच्छी बारिश के लिए पूजा कराया. इससे पूर्व आगत अतिथियों का बड़ा जिलिंगा एवं छोटा जिलिंगा के खोड़हा टीम ने गीत नृत्य मांदर नगाड़ा के साथ स्वागत किया.

मौके पर युवा नेता सह मूली पड़हा के कोटवार देवेंद्र लाल उरांव ने जतरा को संबोधित करते हुए कहा कि जतरा हमारी सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है. ये हमें एकदूसरे से जोड़ने का काम करती है. लेकिन अभी के समय में देखा जा रहा है कि आज हमारा आदिवासियत खतरे में है. हमारी संस्कृतियों, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं पर चौतरफा हमला हो रहा है. हमारी पूजा-पाठ, नेग-चार, सरना-मसना, सरहूल करमा, उरांव, मुंडा व खड़िया सहित जातिगत रिवाजों, भाषा, हमारी पहचान और शान है. उसे हमें संजोये रखना है. मुख्यअतिथि मूली पड़हा के बेल देवराम भगत ने कहा कि पर्व-त्योहार, जतरा व सेंदरा हमारी विरासत धरोहर है. इसे हमें कायम रखना है. लेकिन साथ ही साथ हमारे समाज को शिक्षा से जोड़ना होगा. नशा से मुक्त होना होगा और अंधविश्वासों के दूर करना होगा. तभी हमारा समाज सबल, संगठित और मजबूत होगा.

कार्यक्रम को समाजिक नेता हांदू भगत, पादा देवान राजू उरांव, मुखिया रमेश उरांव आदि ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर मंच का संचालन गौतम व धन्यवाद ज्ञापन संरक्षक भैयाराम उरांव ने किया. मौके पर पड़हा परमर्शदात्री राजबेल उरांव, कहतो महेंद्र उरांव, सुशील भगत, लक्ष्मी देवी, माधूरी मिंज, एलेन उरांव, पंसस सोमेश्वर उरांव, महादेव भगत, कृष्णा उरांव सहित काफी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे.

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