भारतमाला सड़क परियोजना का विरोध, 10 किमी पैदल चलकर थाना पहुंचे टाना भगत
गुमला में भारतमाला सड़क परियोजना को विरोध तेज हो गया है. गुमला के लट्ठा बरटोली गांव में विवाद गंभीर रूप लेता जा रहा है. गुरुवार की रात को दर्जनों टाना भगत और ग्रामीण करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर गुमला थाना पहुंचे तथा न्याय की गुहार लगायी. टाना भगत समुदाय ने निर्माण कार्य में लगी शिवालया कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महात्मा गांधी के अनुयायियों की जमीन को “फूट डालो और राज करो” की नीति के तहत छीने जाने की साजिश की जा रही है.
टाना भगतों का आरोप है कि भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों और मुआवजा नहीं लेने वाले रैयतों को निशाना बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि लट्ठा बरटोली गांव के सैकड़ों लोग शिवालया कंपनी से मिलकर जमीन की रखवाली कर रहे टाना भगतों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. घटना में कई महिला टाना भगतों के साथ बदसलूकी किये जाने का भी आरोप लगाया गया है. शिकायत के अनुसार सोमो टाना भगत, बिरसो उरांव, जया टाना भगत, काजल उरांव सहित अन्य महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया. वहीं कार्तिक उरांव टाना भगत, राजी दिवान, फौदा उरांव तथा ग्राम प्रधान टिपरु मुंडा समेत कई लोगों के साथ मारपीट हुई है.
कंपनी अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप
टाना भगतों ने आरोप लगाया है कि शिवालया कंपनी के लाइजनिंग मैनेजर दिगंबर सिंह ने मुआवजा प्राप्त कर चुके ग्रामीणों को उकसाकर विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ खड़ा कर दिया है. उनका दावा है कि मारपीट की घटना में शामिल कुछ लोग असामाजिक तत्व थे. जिन्हें कंपनी के “गुंडे” के रूप में इस्तेमाल किया गया. शिकायत में यह भी कहा गया है कि महिलाओं के कपड़े फाड़े गये. टाना भगतों के करघा चिह्न वाले झंडों को फाड़कर पैरों तले रौंद दिया गया. जिससे समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है.
जमीन हमारी है, पहरेदारी करना हमारा अधिकार
थाना पहुंचे टाना भगतों ने कहा कि जिस जमीन पर सड़क का कार्य चल रहा है. वह उनकी पुश्तैनी भूमि है और उसकी रक्षा करना उनका अधिकार है. उन्होंने कहा कि टाना भगत समाज की जमीन की खरीद-बिक्री नहीं होती. फिर बिना ग्रामसभा की अनुमति के भूमि अधिग्रहण कैसे कर लिया गया. टाना भगतों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए. बल्कि उनकी जमीन वापस छोड़ दी जाये. उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य इसी जमीन पर निर्भर है और खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है.
फसलों पर चली मशीनें, खून-खराबे की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान मशीनों से उनकी खड़ी फसलें रौंद दी गयी. जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो क्षेत्र में कभी भी बड़ा विवाद और खून-खराबा हो सकता है. टाना भगतों ने थाना में लिखित आवेदन देकर मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई, महिलाओं के साथ हुई कथित बदसलूकी की जांच तथा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है.
