कहानी है लाधुडेरा गांव की: न चलने को सड़क, न पीने को पानी
गुमला के पालकोट प्रखंड के बिलिंगबिरा पंचायत में लाधुडेरा गांव है. इस गांव में न चलने के लिए सड़क है. न पीने के लिए पानी है. नदी का पझरा पानी पीते हैं. इलाज की भी कोई व्यवस्था नहीं है. आजादी के 77 साल बाद भी लाधुडेरा गांव की यह हकीकत सरकार व प्रशासनिक काम के दावों की पोल खोल रही है. गांव के लोग पूछ रहे हैं. विधायक, सांसद व जिले के अधिकारी कहां हैं. विकास के जो वादे किये जा रहे हैं.
उसकी हकीकत लाधुडेरा गांव है. जो कि आज भी संकट में जी रहा है. यह गांव एक समस्या नक्सल से जूझ रहा था. नक्सल के डर से अधिकारी गांव नहीं जाते थे. परंतु, अब पुलिस की दबिश से इलाका शांत हो गया है. नक्सल भी खत्म हो गया है. नक्सल खत्म होने के बाद प्रशासन ने मुंह मोड़ लिया है. ग्रामीणों ने कहा है कि गांव में सड़क नहीं है. बीमार व गर्भवती महिलाओं को खटिया में लादकर अस्पताल लाया जाता है.
गांव की चार प्रमुख समस्या
पानी की समस्या : गांव में पीने का पानी चुआं और डाड़ी है. गर्मी में सूख गया है. अभी नदी का पानी पी रहे हैं. सरकार की तरफ से पानी की व्यवस्था नहीं की गयी है.
बिजली की समस्या : सरकार का दावा है. हर गांव में बिजली है. लेकिन लाधुडेरा गांव में आजादी के 77 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची है. गांव में सोलर लगा था. वह कुछ साल पहले खराब हो चुका है.
सड़क की समस्या : गांव में मुख्य सड़क नहीं है. जिसेसे की ग्रामीणों को आने जाने में बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है. बरसात के दिनों में गांव के लोगों को गांव तक ही सहमित रहना पड़ता है.
स्वास्थ्य की समस्या : गांव में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है. अगर कोई बीमार हो जाये तो इलाज के अभाव में कई लोगों की जान जा चुकी है. इसलिए हर सप्ताह एक नर्स गांव में कैंप करें.
