झारखंड

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्मभूषण मिलने पर नेमरा गांव में मना जश्न

गोला प्रखंड स्थित नेमरा गांव के लिए 23 जून का दिन ऐतिहासिक बन गया. झारखंड आंदोलन के महानायक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित करने के बाद उनके पैतृक गांव नेमरा में खुशी की लहर दौड़ गयी. गांव के लोगों ने इसे पूरे झारखंड के लिए गर्व और सम्मान का क्षण बताया. ग्रामीणों के बीच उत्साह का माहौल रहा और लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी. गौरतलब हो कि शिबू सोरेन को आदिवासी समाज के उत्थान, झारखंड आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक भूमिका तथा सार्वजनिक जीवन में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है.

नेमरा गांव के लोगों का कहना है कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों, वंचितों और शोषितों के अधिकारों की लड़ाई में समर्पित कर दिया. झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता. ग्रामीणों ने कहा कि गुरुजी ने न केवल राजनीतिक नेतृत्व दिया, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनाधिकारों की लड़ाई को भी नयी दिशा दी.

यह सम्मान पूरे परिवार और नेमरा गांव के लिए गौरव की बात है : गुरुजी की भतीजी सह गोला पूर्वी क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य रेखा सोरेन ने कहा कि यह सम्मान पूरे परिवार और नेमरा गांव के लिए गौरव की बात है. उन्होंने कहा कि बाबा ने झारखंड आंदोलन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. वे आदिवासी, दलित, पिछड़े और शोषित वर्गों की आवाज बने रहे. रेखा सोरेन ने भावुक होकर कहा कि यदि गुरुजी आज हमारे बीच होते और स्वयं यह सम्मान ग्रहण करते, तो खुशी और भी अधिक होती.

झारखंड के लिए गौरव भरा क्षण : विधायक

रामगढ़ विधायक ममता देवी ने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा का प्रतीक रहा है. अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने झारखंड के लोगों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु को पद्मभूषण सम्मान मिलना गोला ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय है. उनके योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा. विधायक ने रामगढ़ जिले के किसी प्रमुख स्थल पर शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की.

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