गुमला

बेटी के जन्म पर अनोखा उत्सव, सजी-धजी कार से घर पहुंची नन्ही परी

कभी बेटियों के जन्म पर मायूसी और भेदभाव की सोच रखने वाला समाज अब धीरे-धीरे बदल रहा है. बेटियां अब बोझ नहीं, बल्कि परिवार की खुशियों और गर्व का कारण बन रही हैं. इस बदलती सामाजिक सोच की एक खूबसूरत मिसाल बुधवार को गुमला सदर अस्पताल में देखने को मिली. जहां नवजात बेटी के जन्म पर परिवार ने ऐसा उत्सव मनाया कि हर किसी की नजरें उस ओर ठहर गयी.

शहर के जवाहर नगर निवासी अधिवक्ता मुकेश पाठक और उनकी पत्नी रजनी कुमारी के घर बेटी ने जन्म लिया. नन्ही परी के आगमन से परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गयी. बेटी के जन्म को यादगार बनाने के लिए परिवार ने अस्पताल से घर ले जाने के दौरान विशेष आयोजन किया. एक सजी-धजी कार फूलों और सजावट से तैयार कर सदर अस्पताल पहुंची. जहां से मां और नवजात बेटी को पूरे सम्मान और उत्साह के साथ घर ले जाया गया.

अधिवक्ता मुकेश पाठक ने बताया कि बेटी के जन्म की खुशी में परिवार ने अस्पताल में ही करीब 21 किलो रसगुल्ले बांटे. उन्होंने कहा कि बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं और उनके जन्म पर भी उतना ही उत्सव मनाया जाना चाहिए. जितना बेटे के जन्म पर मनाया जाता है. उनका उद्देश्य केवल अपनी खुशी का इजहार करना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी था कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं. उन्होंने सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने बेहतर सेवाएं प्रदान कीं. उन्होंने लोगों से सरकारी अस्पतालों पर भरोसा जताने की अपील भी की.

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