गुमला के नेल्सन भगत पर गर्व : डिग्री हाथ में, मगर चुनी समाज सेवा की राह
आज के दौर में अच्छी शिक्षा और डिग्री हासिल करने के बाद अधिकांश युवाओं का सपना बेहतर नौकरी हासिल करना होता है. लेकिन गुमला के एक आदिवासी युवक ने अपने लिए अलग रास्ता चुना है. उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी करने के बजाय उन्होंने अपना जीवन समाज के युवाओं को आगे बढ़ाने और आदिवासी समाज को जागरूक करने के लिए समर्पित कर दिया. यह युवक हैं गुमला के नेल्सन भगत, जो शहर में लक्ष्य फिजिकल एकेडमी के माध्यम से युवाओं को सेना और पुलिस में भर्ती की तैयारी करा रहे हैं. उनके प्रयास से कई युवा आज सेना में सेवा दे रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में युवक-युवतियां सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे हैं. नेल्सन भगत की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो शिक्षा प्राप्त करने के बाद केवल अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं. नेल्सन ने अंग्रेजी विषय से स्नातक की पढ़ाई की है. इसके अलावा उन्होंने एमए और बीपीएड की डिग्री भी हासिल की है. उनकी शैक्षणिक योग्यता ऐसी है कि वह आसानी से नौकरी की दिशा में आगे बढ़ सकते थे. लेकिन उन्होंने अपने समाज और क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने का रास्ता चुना.
2021 में शुरू की एकेडमी
नेल्सन भगत ने वर्ष 2021 में लक्ष्य फिजिकल एकेडमी की शुरुआत की. शुरुआत का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के उन युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना था. जिनमें सेना और पुलिस में जाने का जज्बा तो है. लेकिन उचित मार्गदर्शन और प्रशिक्षण का अभाव है. धीरे-धीरे एकेडमी से युवाओं का जुड़ाव बढ़ता गया और आज यहां करीब 250 युवक-युवतियां सेना, पुलिस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. एकेडमी में अधिकांश युवा आदिवासी समाज और दूरदराज के गांवों से आते हैं. इनमें कई ऐसे युवा हैं, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है. ऐसे युवाओं के लिए सही दिशा, अनुशासन और नियमित प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण है. नेल्सन भगत उन्हें केवल शारीरिक प्रशिक्षण ही नहीं देते, बल्कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मार्गदर्शन करते हैं.
सुबह मैदान में पसीना, दोपहर में पढ़ाई
लक्ष्य फिजिकल एकेडमी में युवाओं की दिनचर्या अनुशासित तरीके से चलती है. सुबह के समय युवाओं को सेना और पुलिस में भर्ती के लिए आवश्यक शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है. दौड़, व्यायाम और अन्य शारीरिक अभ्यास के माध्यम से युवाओं को भर्ती की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाता है. इसके बाद अलग-अलग समय पर युवाओं को पढ़ाई भी कराई जाती है. नेल्सन का मानना है कि केवल शारीरिक रूप से मजबूत होना पर्याप्त नहीं है. सेना और पुलिस में भर्ती के लिए लिखित परीक्षा और अन्य प्रक्रियाओं में भी बेहतर प्रदर्शन जरूरी है. इसी वजह से एकेडमी में शारीरिक प्रशिक्षण के साथ पढ़ाई पर भी विशेष जोर दिया जाता है. युवाओं को प्रशिक्षण देने में नेल्सन का साथ उनके जैसे ही छह अन्य शिक्षक भी दे रहे हैं. टीम के रूप में सभी प्रशिक्षक युवाओं को अलग-अलग विषयों और प्रशिक्षण क्षेत्रों में मार्गदर्शन करते हैं. सेना और पुलिस की तैयारी के अलावा युवाओं को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाती है.
कई युवा बन चुके हैं सैनिक
नेल्सन भगत के प्रयासों का असर अब दिखायी देने लगा है. उनके मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से कई युवा सेना में चयनित होकर देश की सेवा कर रहे हैं जो युवा कभी संसाधनों और उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने भविष्य को लेकर असमंजस में रहते थे, उनमें से कई अब अपने लक्ष्य की ओर बढ़ चुके हैं. नेल्सन के लिए युवाओं का सेना या पुलिस में चयन होना केवल किसी एक व्यक्ति की सफलता नहीं है, बल्कि पूरे समाज की उपलब्धि है. उनका उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को सही दिशा देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. वह युवाओं से अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने की अपील करते हैं.
नौकरी के बजाय समाज सेवा को चुना
नेल्सन भगत की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपनी शिक्षा का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत करियर बनाने के लिए नहीं किया. उनके पास कई डिग्रियां हैं और वह नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने समाज के बीच रहकर काम करने का फैसला लिया. उनका मानना है कि यदि शिक्षित युवा अपने समाज और गांव के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम करें, तो क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. इसी सोच के साथ वह युवाओं को प्रशिक्षण देने के अलावा सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय हैं.
रात में गांवों में करते हैं जागरूकता अभियान
दिनभर युवाओं को प्रशिक्षण और पढ़ाई कराने के बाद नेल्सन भगत का काम खत्म नहीं होता. वह रात के समय भी किसी न किसी गांव में जाकर लोगों के साथ बैठक और सभा करते हैं. इन बैठकों के माध्यम से वह आदिवासी समाज के लोगों को उनके अधिकार, शिक्षा, सामाजिक एकजुटता और समाज की वर्तमान स्थिति के प्रति जागरूक करने का प्रयास करते हैं. गांवों में जाकर वह लोगों से आपसी एकता बनाये रखने, बच्चों को शिक्षा दिलाने और युवाओं को सही दिशा में आगे बढ़ाने की अपील करते हैं. उनका प्रयास है कि समाज के युवा केवल रोजगार की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को भी समझें.
सोशल मीडिया को भी बनाया जागरूकता का माध्यम
नेल्सन भगत सामाजिक जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. वह सोशल मीडिया के माध्यम से आदिवासी समाज से जुड़े विषयों को सामने रखने और लोगों को एकजुट करने का प्रयास करते हैं. उनका मानना है कि आज के समय में सोशल मीडिया समाज तक अपनी बात पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है. इसका सकारात्मक उपयोग कर युवाओं और समाज के लोगों को जागरूक किया जा सकता है.
युवाओं में पैदा कर रहे आत्मविश्वास
आदिवासी बहुल गुमला जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. जरूरत है तो सिर्फ उन्हें सही दिशा और अवसर देने की। नेल्सन भगत इसी दिशा में काम कर रहे हैं. वह ग्रामीण युवाओं में यह विश्वास पैदा कर रहे हैं कि वे भी सेना, पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं में जाकर अपने परिवार, समाज और जिले का नाम रोशन कर सकते हैं. उनकी एकेडमी में आने वाले युवाओं के लिए वह केवल प्रशिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका भी निभा रहे हैं. युवाओं की मेहनत और उनके मार्गदर्शन का परिणाम यह है कि कई युवाओं ने अपने सपनों को हकीकत में बदलना शुरू कर दिया है. नेल्सन भगत का प्रयास यह संदेश देता है कि शिक्षा और डिग्री का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग को आगे बढ़ाने में भी योगदान देना हो सकता है. गुमला में लक्ष्य फिजिकल एकेडमी के माध्यम से वह जिस तरह युवाओं को सेना और पुलिस की तैयारी करा रहे हैं और साथ ही आदिवासी समाज को जागरूक करने के लिए गांव-गांव पहुंच रहे हैं, वह समाज के लिए एक सकारात्मक पहल है. एक ओर जहां उनके प्रशिक्षित युवा देश की सेवा के लिए तैयार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नेल्सन भगत स्वयं समाज को जागरूक और संगठित करने के अभियान में जुटे हैं. यही उनका लक्ष्य है और यही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बनती जा रही है.
