सरना धर्म कोड और परिसीमन के विरोध में 4 अक्टूबर को आदिवासियों का महाजुटान
गुमला : आदिवासी छात्र संघ केंद्रीय समिति रांची एवं सरना प्रार्थना सभा जिला समिति की ओर से सरना धर्म कोड लागू कराने और प्रस्तावित परिसीमन के विरोध में शनिवार को गुमला में प्रेस वार्ता आयोजित की गई. प्रेस वार्ता में आदिवासी छात्र संघ के मुख्य संयोजक सुशील मिंज, केंद्रीय संयोजक जतरू उरांव तथा सरना प्रार्थना सभा के अहलाद उरांव ने संयुक्त रूप से कहा कि सरना धर्म कोड के अभाव में आदिवासियों की वास्तविक आबादी दर्ज नहीं हो पा रही है. इसके कारण परिसीमन के दौरान आदिवासी बहुल क्षेत्रों और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा व लोकसभा सीटों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है.
सुशील मिंज ने कहा कि देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन सहित विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग धर्म कोड उपलब्ध हैं, लेकिन आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड नहीं है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की धार्मिक पहचान और जनसंख्या की सही गणना के लिए सरना धर्म कोड लागू किया जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि आगामी 2027 की जनगणना में आदिवासियों को अलग सरना धर्म कोड के तहत दर्ज किया जाए, ताकि देश में आदिवासियों की वास्तविक आबादी और पहचान स्पष्ट हो सके.
जतरू उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड लागू नहीं होने के कारण जनगणना में आदिवासियों की संख्या को अन्य धर्मों के आंकड़ों में शामिल किए जाने की स्थिति बनती है. उन्होंने कहा कि आजादी से पहले आदिवासियों की गणना अलग आदिवासी धर्म के रूप में की जाती थी, लेकिन 1961 की जनगणना के दौरान धर्म संबंधी व्यवस्था में बदलाव के बाद आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड समाप्त कर दिया गया. उन्होंने कहा कि लंबे समय से मांग किए जाने के बावजूद अब तक सरना धर्म कोड लागू नहीं किया गया है.
अहलाद उरांव ने कहा कि संगठन द्वारा घोषित महारैली की तैयारी पूरी कर ली गई है. रविवार 4 अक्टूबर को गुमला के सरना सम्मेलन मैदान में सरना धर्म कोड लागू कराने और परिसीमन के विरोध में महारैली आयोजित होगी. महारैली में बड़ी संख्या में आदिवासियों के शामिल होने का दावा किया गया है. उन्होंने बताया कि महारैली के मुख्य अतिथि आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा होंगे. महारैली के बाद उपायुक्त गुमला को ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसे भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय और जनगणना विभाग तक भेजने की मांग की जाएगी.
उन्होंने कहा कि संगठन की मांग है कि 2027 की जनगणना में सरना धर्म कोड को शामिल किया जाए और आदिवासियों की आबादी को अलग सरना धर्म कोड के तहत दर्ज किया जाए. यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आदिवासी छात्र संघ और सरना प्रार्थना सभा द्वारा जनगणना का विरोध किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन के विरोध में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई. वक्ताओं ने खनिज संपदा के मुद्दे पर भी आंदोलन की बात कही.
उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों से खनिज संपदा के बाहर जाने के विरोध में आर्थिक नाकेबंदी जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे. प्रेस वार्ता में आगामी चुनाव को लेकर भी संगठन की ओर से राजनीतिक दलों के बहिष्कार की घोषणा की गई. वक्ताओं ने कहा कि आगामी आम चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों राजनीतिक दलों का बहिष्कार किया जाएगा. हालांकि, यह संगठन की घोषित राजनीतिक रणनीति है. प्रेस वार्ता में जतरू उरांव, सुशील कुमार मिंज, अहलाद उरांव के अलावा अमीन उरांव, मालती उरांव, अंजली मिंज, मनीता कुमारी, सरस्वती उरांव, मगरी मिंज, पचौला उरांव, अमृता उरांव, अमित उरांव समेत अन्य मौजूद थे.
