गुमला

Video : स्कूल या खतरे का घर? गुमला के पालकोट में जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे

टूटी छत के नीचे बैठा, हर दिन लिखता एक सवाल,

कैसे होगा उज्ज्वल कल, जब आज ही इतना बेहाल।

किताबें कहतीं आगे बढ़ो, छत कहती है ठहर जाओ,

सपनों वाले इस स्कूल को, अब तो कोई बचाने आओ।

जरा सोचिए… जिस स्कूल में बच्चे ‘अ’ से अनार और ‘क’ से कबूतर सीखने जाते हैं, उसी स्कूल में सबसे बड़ा सबक ये मिल रहा है कि जान बचाकर कैसे पढ़ाई की जाए. ये तस्वीर झारखंड के गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की है. डहुपानी पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय केसीडीह में बच्चे किताबों से कम, छत से ज्यादा नजरें मिलाकर पढ़ाई कर रहे हैं. क्योंकि यहां क्लासरूम की छत कभी भी टूटकर गिर सकती है.

गुमला के पालकोट प्रखंड स्थित डहुपानी पंचायत के इस सरकारी स्कूल में केजी से पांचवीं तक कुल 19 बच्चे पढ़ते हैं. पढ़ाने के लिए दो सरकारी शिक्षक हैं. लेकिन सबसे बड़ी परेशानी पढ़ाई नहीं, बल्कि जर्जर स्कूल भवन है. दो कमरों वाले इस विद्यालय की छत जगह-जगह से टूट रही है. बारिश होते ही पानी सीधे क्लासरूम में टपकने लगता है. ऐसे में बच्चे और शिक्षक हर दिन डर के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

विद्यालय के प्रधानाध्यापक पांडू भगत बताते हैं कि दोनों कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं. कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. उनका कहना है कि पंचायत के जनता दरबार से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

क्लास चार के अर्पित सोरेंग, क्लास  पांच के अर्जुन गोप सहित अन्य विद्यार्थियों का कहना है कि क्लासरूम में बैठकर पढ़ाई करने में डर लगता है.

विप्रस अध्यक्ष सह पूर्व मुखिया अनुज सोरेंग ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग को ध्यान देने की जरूरत है. पंचायत के मुखिया कमल पहान ने बताया कि जब 2022 में वे मुखिया बने थे तो अपने मद से विद्यालय का मरम्मती करवाये थे. वर्तमान में फिर स्थित वैसी ही हो गयी है. उन्होंने बताया कि विद्यालय को चुनाव के समय मतदान करने के लिए केंद्र बनाया जाता है. चुनाव के समय में नेता आते हैं और वादे कर चले जाते हैं. जनप्रतिनिधियों ने सरकार व प्रशासन से विद्यालय की मरम्मती कराने की मांग की है.

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