पुल नहीं होने से टापू बना गांव, बरसात में जान जोखिम में डाल नदी पार करते हैं 32 परिवार
प्रखंड की कसनी पंचायत अंतर्गत पहाड़ सुवाली गांव के 32 परिवार बरसात के दिनों में टापू जैसी स्थिति में रहने को विवश हैं. गांव जाने के रास्ते में लफरी नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को तेज बहाव के बीच नदी पार करनी पड़ती है. खासकर बारिश के दिनों में स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है. किसी के बीमार होने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की स्थिति में ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर नदी पार करते हैं.
ग्रामीणों के अनुसार, पछाड़ सुवाली गांव में जलाशय योजना बनाने का प्रस्ताव था, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया था. इसके बाद से गांव के विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया. दस वर्ष पूर्व कसनी सुवाली समेत आसपास के कई गांवों को जोड़ने के लिए पक्की सड़क का निर्माण किया गया, लेकिन लफरी नदी पर पुल का निर्माण नहीं कराया गया. इससे सड़क होने के बाद भी ग्रामीणों को बरसात में आवागमन के लिए नदी पार करनी पड़ती है.
छत्तीसगढ़ के पहाड़ी क्षेत्रों से बारिश का पानी आने के कारण लफरी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है. वहीं, सड़क से कुछ दूरी पर चेकडैम बनने के बाद नदी के इस हिस्से में पानी लंबे समय तक जमा रहता है. इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गयी है. तेज बहाव के बीच नदी पार करना हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है. पानी बढ़ने पर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी चिंतित रहते हैं.
कैसे दूर होगी परेशानी
ग्रामीणों ने कहा कि लफरी नदी पर पुल बन जाने से गांव के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. ग्रामीण लंबे समय से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं हुई है. ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से लफरी नदी पर जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है.
