गुमला

अस्पताल ने खड़े किए हाथ, पति की जान बचाने को पत्नी ने फैलाए मदद के हाथ

गुमला सदर अस्पताल में भर्ती एक मरीज के इलाज के लिये उसकी पत्नी को सड़क पर लोगों से मदद मांगने के लिये मजबूर होना पड़ा. अस्पताल प्रबंधन द्वारा अपनी औपचारिकतायें पूरी करने के बाद हाथ खड़े कर देने का आरोप लगाते हुए मरीज के परिजनों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाये हैं. सदर प्रखंड के काटासारू गांव निवासी जगन्नाथ तिर्की पिछले एक सप्ताह से सदर अस्पताल गुमला में भर्ती हैं. पति का इलाज करवा रही उनकी पत्नी रोहिणी कुजूर ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उनके इलाज में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

परिवार के पास न तो राशन कार्ड है और न ही इलाज कराने के लिये पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं. घर में कमाने वाला केवल एक ही इंसान है और वह भी गंभीर बिमारी के कारण अस्पताल में पड़ा हुआ है. पति की जान बचाने की आस में जगन्नाथ तिर्की की पत्नी रोहिणी कुजूर स्थानीय जशपुर रोड स्थित टंगरा मार्केट के समीप आंचल फैलाकर राहगीरों से आर्थिक सहायता मांगती नजर आयी. उनके साथ देवकी देवी, जिलाध्यक्ष सह प्रदेश सचिव, भी मौजूद थीं. दोनों ने लोगों से मरीज के इलाज में सहयोग करने की अपील की. मानवीय संवेदना दिखाते हुए राहगीरों ने 10, 20, 50, 100-200 रुपये तक की सहायता दी, लेकिन परिजनों का कहना है कि यह राशि इलाज के लिये पर्याप्त नहीं है.

पति के जिंदा रहते ही हो गयी हूं असहाय : रोहिणी

रोहिणी कुजूर ने बताया कि परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है. अस्पताल में मिलने वाले भोजन के सहारे ही वह, उनके पति और छोटा बच्चा किसी तरह गुजारा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पति की हालत गंभीर है और छोटे बच्चे की जिम्मेदारी के बीच वह खुद को असहाय महसूस कर रही हैं. राशन कार्ड नहीं बनने के कारण बाहर से दवाईयां मंगवानी पड़ रही है. एक ओर पति की चींख दूसरी ओर छोटे बच्चे की जिम्मेदारी और इन सबके बीच पैसे की कमी ने मुझे अब जीने के लायक भी नहीं छोड़ा है.

मदद करे अस्पताल प्रबंधन : देवकी देवी

वहीं जिलाध्यक्ष देवकी देवी ने सरकार, जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों से अपील करते हुए कहा कि जगन्नाथ तिर्की के इलाज के लिए तत्काल आर्थिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि समय पर उपचार मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके.

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