गुमला

2018 की अधिसूचना में सिमडेगा-गुमला के 206 गांव बने इको सेंसेटिव जोन, अधिसूचना रद्द करने की मांग

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव चैतु उरांव ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना संख्या का. आ. 776(आ) तारीख 21 फरवरी 2018 को प्रकाशित अधिसूचना को रद्द करने हेतु सांसद सुखदेव भगत को मांग पत्र सौंपा है. श्री उरांव ने पत्र में कहा है कि पूर्व में पालकोट वन्य जीव अभ्यारण्य बिहार सरकार की अधिसूचना संख्या 1168 तारीक 22 मार्च 1990 द्वारा अधिसूचित किया गया है. लेकिन पुन: वर्तमान में उपरोक्त अधिसूचना के माध्यम से विस्तारित करते हुए अधिसूचित क्षेत्र सिमडेगा जिला के 33 राजस्व ग्राम एवं गुमला जिला के 173 राजस्व ग्राम को इको सेंसेटिव जोन में लाया गया है.

श्री उरांव ने पत्र में स्पष्ट किया है कि अधिसूचित दोनों जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है. जिसके तहत कोई भी राजपत्र अधिसूचित करने से पूर्व गजट का प्रारूप ग्राम सभा, पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद के पटल पर पारित कराना आवश्यक है. लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के तहत आता है. यहां के मूल निवासी आदिवासी हैं. इनका जीवन-यापन खेत और वनों पर निर्भर है. नियमानुकुल अधिसूचित करने से पूर्व कई प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. लेकिन यहां विभागीय स्तर पर कहीं कोई सहमति अथवा प्रक्रिया नहीं किया गया है. गजट का प्रारूप अधिसूचना से पूर्व आम जनता के बीच रखना चाहिये, लेकिन ऐसा नहीं कर जनता को इससे होने वाले लाभ-हानि को छिपाया गया है. पालकोट वन्य अभ्यारण्य एवं परिस्थिति की संवेदी जोन के विस्तार से क्षेत्र के आदिवासियों, मूल निवासियों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. विकास की सारी गतिविधियां एवं संभावनाएं ठप है. यहां लघु खनिज, लघु वनोपज, जल संसधन, सड़क मार्ग, उद्योग-धंधे पूरी तरह से बंद है. इसके अतिरिक्त कई ऐसे गतविधियां भी निषिद्ध किया गया है जो गजट अधिसूचना में अधिसूचित है.

श्री उरांव ने पत्र में यह भी कहा है कि अधिसूचना उपरांत यह क्षेत्र सरकार एवं पदाधिकारियों के लिए दुधारू गाय साबित हो रहा है. विकास के नाम पर कागजों में खानापूर्ति कर बड़े धनराशि का गबन किया जा रहा है. श्री उरांव ने पत्र के माध्यम से पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा गजट अधिसूचिना को गहनता पूर्वक अध्ययन उपरांत इससे होने वाले नुकसान एवं क्षेत्र के आदिवासियों एवं मूल निवासियों के मौलिक अधिकारों से वंचित करने एवं जल, जंगल, जमीन से बेदखल करने की साजिश को रोकने की दिशा में पहल करने का अनुरोध किया है.

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