गुमला

जल, जंगल, जमीन व जनजातीय समाज की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर किया था बिरसा मुंडा ने : मंगल सिंह

धरती अबा भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर गुमला प्रखंड के जामटोली स्कूल मैदान में शहीद मेला का आयोजन किया गया. इसमें आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग शामिल हुए. पारंपरिक वेश भूषा और वाद्य यंत्र के साथ मेला में शामिल होकर जनजातीय समुदाय के सदस्यों ने भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को आत्मसात करने, गीत संगीत और नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत, रीति रिवाज, परंपरा के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता सह समाजसेवी मंगल सिंह भोगता ने पुजारी संदीप उरांव, शनिचर लोहरा, शंकर महली के नेतृत्व में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और फीता काटकर नागपुरी रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का उदघाटन किया. मंगल सिंह भोगता ने कहा कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए जनजातीय समाज को एकजुट किया और अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध कर अपने प्राणों की आहुति दे दी. उस महान आत्मा स्मृति में जामटोली मैदान में जुटी भीड़ इस बात को साबित करता है कि त्यागी व्यक्ति हमेशा पूजनीय होते हैं.

यही कारण है कि बिरसा मुंडा और भगवान और धरती आबा बन गये. उन्होंने धरती आबा के स्मृति में 35 साल पहले मेला आरंभ करने वाले संस्थापक सदस्यों को भी नमन किया और आगामी वर्षों से मेला को बृहद रूप दिये जाने की घोषणा की. चमरु महली के नेतृत्व में पंपम सिंह, रितिका देवी, सुहाना देवी आदि ने नागपुरी गीत संगीत से समा बांधने का काम किया. गांव के खोड़हा दल ने पारंपरिक गीत संगीत और नृत्य प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में बसंत लोहरा, शनिचर उरांव, सुधैन देवी, चमार उरांव, विश्वेश्वर महली, राजू महली, महावीर खड़िया, बुधेश्वर उरांव, विजय उरांव, विकास गोप, दिनेश साहू, रतिया गोप, मंगरु लोहरा, बजरंग महली, राम महली, रमेश गोप, अमर महली आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा. कार्यक्रम का संचालन सुखसारण लोहरा ने किया. अंत में सभी खोड़हा दल को सम्मानित किया गया.

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