पब्लिक मुद्दा : नेताजी कहां है, बाजार टाड़ थोड़ा पैदल घूम लीजिये, पहले खबर और वीडियो भी देख लीजिए
यह पब्लिक मुददा है. परेशानी है, तो जनता बोलेगी. नेताजी को वोट देते हैं, तो उनका अधिकार है. अच्छी सड़कें चलने को मिले. लेकिन, नेताजी कहां हैं. किसी को पता नहीं है. ऐसे, लोगों ने नेताजी से अपील किया है. एक बार बाजार टाड़ पैदल घूम लीजिये. तब पता चलेगा कि विकास कहां हुआ है और किसका हुआ है. जी हम बात कर रहे हैं. गुमला शहर के बाजार टाड़ की. सरकार को लाखों रुपये राजस्व देने वाला बाजार टाड़ में अगर आप पैदल घूम लीजियेगा तो आपके कपड़े गंदे हो जायेंगे. बाजार टाड़ की मुख्य सड़क वर्षो पहले टूट गयी है. हर बरसात में सड़क पर कीचड़ जमा हो जाता है. बरसात खत्म होने के बाद लोगों को उबड़ खाबड़ सड़क से सामना होता है. लंबे समय से लोग बाजार टाड़ की सड़क को बनाने की मांग कर रहे हैं. नेताजी तक भी मामला पहुंचा है. खुद नेताजी के वोटरों ने ही बाजार टाड़ की हकीकत से रूबरू कराया है. इसके बाद भी सड़क नहीं बनी. अभी बरसात शुरू हो गया है. बाजार टाड़ की सड़क कीचड़ में तब्दील हो गयी.
लोगों ने कहा है कि ठेका-टेंडर से निकलकर एक बार बाजार टाड़ की सड़क पर भी नेताजी बोलते तो उम्मीद थी. नगर परिषद से उक्त सड़क बन जाती. लेकिन यहां ठेका-टेंडर नहीं मिलने से शहर के विकास को ही रोक दिया गया. 32 योजनाएं बरसात से पहले पूरी होनी थी. लेकिन सभी 32 योजनाओं पर काम बंद करा दिया गया. समाज सेवी मनीष कुमार ने बाजार टाड़ की सड़क की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल हुआ है. इसके बाद यह चर्चा का बाजार गरम हो गया है. हाकिम से लेकर नेताजी के कार्यो तक चर्चा हो रही है. विपीन कुमार ने कहा है कि अगर गुमला के पूर्व उपायुक्त सुशांत गौरव को गुमला में रहने दिया जाता तो वे शहर को स्वर्ग बना देते. लेकिन गुमला से उनका तबादला करा दिया गया. जिसका नतीजा है. बाजार टाड़ की सड़क नहीं बनी है.
हजारों किसान बाजार आते हैं
युवा नेता मिशिर कुजूर ने कहा है कि गुमला शहर में शनिवार व मंगलवार को दो दिन बाजार लगता है. इसमें गुमला के अलावा दूसरे राज्य के किसान भी सब्जी व अन्य सामग्री बेचने बाजार बाते हैं. हजारों कृषकों की जीविका का साधन बाजार टाड़ है. परंतु, बाजार टाड़ का जो हाल है. यहां के नेताजी की सोच पर सवाल खड़ा कर रहा है. नेताजी नहीं चाहते हैं कि बाजार टाड़ सुंदर हो. पहले से वे बाजार टाड़ के विकास का विरोध करते रहे हैं. इसलिए बाजार टाड़ के लिए जो भी योजना आयी है. अगर नेताजी को उससे लाभ नहीं मिलता तो वे विकास का काम करने नहीं देते हैं.
गुमला के नेताजी के मनपसंद लोगों को ठेका नहीं मिला तो वे 32 योजनाओं पर रोक लगवा दिये. अगर नेताजी इतना ही विकास चाहते हैं तो तीन बार विधायक रहने के बावजूद अबतक वे बाजार टाड़ की सड़क को नहीं बनवा सके. जहां से वोट मिलता है. नेताजी उसी क्षेत्र के विकास से मुंह मोड़े हुए हैं. यह चिंता की बात है. अगर नगर परिषद के बोर्ड को ईमानदारी से काम करने दिया जाये आने वाले कुछ महीनों में शहर सुंदर हो जायेगा.
शकुंतला उरांव, अध्यक्ष, नगर परिषद
चुनाव नहीं होने के कारण लंबे समय तक नगर परिषद बोर्ड ठप था. चुनाव होने के बाद नगर परिषद बोर्ड का गठन हुआ. बोर्ड बनते ही शहर के विकास के लिए प्लान बनाकर काम शुरू किया गया. इसके लिए 32 योजनाओं पर ऑनलाइन टेंडर निकाला गया. लेकिन गुमला के रसूखदार नेताजी के कहने पर काम बंद करा दिया गया. नेताजी का यह चेहरा जनता देख ली है. अगर ऐसे ही हाल रहा तो शहर का विकास कभी नहीं हो सकता है.
रमेश कुमार चीनी, उपाध्यक्ष, नप
