प्रकृति की गोद में विराजते हैं भोलेनाथ, गुमला के पहाड़गांव के प्राचीन शिव मंदिर की कहानी है अनोखी
गुमला जिले के जंगल-पहाड़ों के बीच कई ऐसे शिवस्थल हैं, जिनके इतिहास और स्थापना काल का कोई पुख्ता प्रमाण आज भी नहीं मिलता. फिर भी इन मंदिरों में अनंत काल से पूजा-अर्चना होती आ रही है. ऐसा ही एक प्राचीन शिव मंदिर कामडारा प्रखंड के सरिता पंचायत स्थित पहाड़गांव के आमटोली में है, जो वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है.
घने जंगल और पहाड़ों से घिरे इस मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है. चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण के बीच ऐसा लगता है, मानो प्रकृति की गोद में स्वयं भगवान शिव विराजमान हों. मंदिर में स्थापित शिवलिंग को स्थानीय लोग बेहद प्राचीन मानते हैं और इसके इतिहास को लेकर कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं.
सबसे खास बात यहां बहने वाली गुप्त गंगा
मंदिर की सबसे खास बात यहां बहने वाली गुप्त गंगा है. मान्यता है कि यहां सालों भर पानी की धारा बहती रहती है. प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का यह अनोखा संगम पहाड़गांव के शिव मंदिर को खास बनाता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु न केवल भगवान शिव के दर्शन करते हैं, बल्कि जंगल-पहाड़ों के बीच बसे इस शांत और मनोरम स्थल की खूबसूरती में भी खो जाते हैं.
आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाए मंदिर
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि पहाड़गांव का यह प्राचीन शिव मंदिर स्वयं भगवान शंभु ने बनवाया है. मंदिर के निर्माण में न तो सीमेंट का इस्तेमाल हुआ है और न ही छड़ या किसी आधुनिक निर्माण सामग्री का. पत्थर के ऊपर पत्थर रखकर प्राचीन काल में बनाए गए इस मंदिर को देखकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं. भक्तों का विश्वास है कि यहां स्वयं भगवान शिव का वास है. यही वजह है कि तेज आंधी और तूफान के बावजूद मंदिर को कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की कृपा मानते हैं.
सावन के महीने में यहां भक्तों की उमड़ती है भीड़
सावन के महीने में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है और मंदिर परिसर में मेला लगता है. पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरिकीर्तन का आयोजन भी होता है. बिहार, बंगाल, ओड़िशा समेत कई राज्यों से श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से यहां मन्नत मांगने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. यही आस्था बड़े नेताओं और अधिकारियों को भी इस प्राचीन शिवस्थल तक खींच लाती है.
प्रखंड मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर है मंदिर
पहाड़गांव का यह प्राचीन शिव मंदिर कामडारा प्रखंड मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है. मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क और रेल, दोनों की सुविधा है। रेलवे से आने वाले श्रद्धालु पकरा स्टेशन पर उतरकर करीब एक किलोमीटर की दूरी तय कर मंदिर पहुंच सकते हैं. वहीं सड़क मार्ग से बाकूटोली से बक्सपुर मोड़ होते हुए पकरा मंदिर टोली तक पहुंचा जा सकता है. प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक आस्था के कारण यह स्थान भविष्य में एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनने की क्षमता रखता है.
