गुमला

गुमला नगर परिषद का ‘नाइट शो’ फेल! रातों-रात बनी, सुबह उखड़ गई सड़क

गुमला नगर परिषद में सड़क मरम्मत के नाम पर एक बार फिर सवालों के घेरे में काम हुआ है. आरोप है कि कार्यपालक पदाधिकारी ने नगर परिषद बोर्ड को जानकारी दिए बिना करीब 1.30 लाख रुपये का टेबल टेंडर निकालकर बस पड़ाव मार्ग, बड़ाइक मुहल्ला स्थित श्रीदुर्गा मंदिर और डीएसपी रोड पर रानी सती दादी मंदिर के पास की जर्जर सड़कों की मरम्मत का काम करा दिया.

बताया जा रहा है कि ठेका मौखिक रूप से एक स्थानीय ठेकेदार को दे दिया गया. इसके बाद रातों-रात सीमेंट, बालू और चिप्स का मिश्रण डालकर सड़क बना दी गई, मानो सुबह तक सब कुछ चमक उठेगा. लेकिन हुआ ठीक उल्टा. सूरज निकलते ही सड़क की परत भी जवाब दे गई और कई जगह उखड़ गई. ऐसा लगा जैसे मरम्मत सड़क की नहीं, सिर्फ कागजों की हुई हो. जब इस पूरे मामले की खबर प्रकाशित हुई तो नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए. अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जनता के पैसे से विकास हो रहा है या सिर्फ खानापूर्ति?

अब नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी भ्रष्टाचार पर परदा डालने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने प्रेस बयान जारी कर अब सड़क का टेंडर निकालने से इंकार कर दिया है. जबकि ठेकेदार ने कहा है कि गुमला शहर की तीन जर्जर सड़कों की मरम्मत कार्यपालक पदाधिकारी के आदेश पर किया है. यहां तक कि नप के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने भी बनते के साथ सड़क टूटने के मामले को गंभीरता से लिया है और कहा है कि कार्यपालक पदाधिकारी कोई भी काम चोरी-छिपे करते हैं.

समाचार में बताई गई सड़क मरम्मत से संबंधित किसी भी प्रकार का कार्य अथवा निविदा हाल के दिनों में नगर परिषद द्वारा निष्पादित नहीं करायी गयी है. समाचार में प्रकाशित तथ्यों का नगर परिषद गुमला पूर्ण रूप से खंडन करता है.
मनीष कुमार, इओ नगर परिषद

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार के मौखिक आदेश (टेबल टेंडर) पर गुमला शहर में बस पड़ाव, दुर्गा मंदिर व डीएसपी रोड की टूटी सड़क की मरम्मत किया है. टेबल टेंडर 1.30 लाख रुपये का हुआ था.
मो शमीम, संवेदक, गुमला

मैंने सड़क बनाने वाले मुंशी से बात किया है. मुंशी ने कहा है कि रात को सड़क की मरम्मत हुई थी. सड़क नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के मौखिक आदेश पर संवेदक ने कराया है. लेकिन सड़क बनते के साथ टूट गयी.
रमेश कुमार चीनी, उपाध्यक्ष

सड़क बनी और टूट भी गयी. अगर कार्यपालक पदाधिकारी टेबल टेंडर निकालकर सड़क नहीं बनवाये हैं तो फिर सड़क कैसे बनकर टूट गयी. इस प्रकार का चोरी-छिपे काम करना गलत है. अगर काम करना था तो मजबूत काम करते.
शकुंतला उरांव, अध्यक्ष

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