गुमला

गुमला : अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व कई पार्षदों ने नगर परिषद में की तालाबंदी, देखें Video

गुमला शहर का विकास रोके जाने का आरोप लगाकर गुरुवार को नगर परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व कई पार्षदों ने नप कार्यालय में ताला जड़ दिया. साथ ही नगर परिषद के सभी कामों को ठप रखने की चेतावनी दी. सिर्फ एसआइआर का काम होगा. बाकी सभी काम ठप रहेगा. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व कई पार्षदों ने कहा है कि टेंडर विवाद को लेकर गुमला शहर का विकास रोक दिया गया है. इस मामले में गुमला प्रशासन को हस्तक्षेप कर सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारना चाहिए था. परंतु, जांच का हवाला देकर शहर में जितने भी विकास के काम हो रहे थे. उसपर रोक लगा दिया गया. यह जनता के साथ अन्यास है. नगर परिषद की अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने कहा है कि एक योजनाबद्ध तरीके से गुमला के विकास को रोका गया है. यहां कुछ लोग नगर परिषद की योजनाओं से कमीशन व टेंडर चाहते हैं. जब कमीशन व टेंडर नहीं मिला तो झूठा आरोप लगाकर 32 योजनाओं के काम पर रोक लगवा दिया गया है.

इस मामले में गुमला उपायुक्त को हस्तक्षेप करना चाहिए. साथ ही शहर को सुंदर बनाने की पहल सभी को मिलकर करनी चाहिए. उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने कहा है कि शहर का विकास नगर परिषद की जिम्मेवारी है. परंतु, कुछ लोग यहां स्वार्थ के लिए नगर परिषद के कामों में अड़चन डाल रहे हैं. यहां टेंडर, कमीशन व नप चुनाव में हार के बाद मिली बेइज्जती का बदला लेने के लिए शहर के विकास को बाधित किया जा रहा है. अगर नगर परिषद के अधिकारी कोई गड़बड़ी किये हैं तो उसकी जांच हो. नगर परिषद के प्रतिनिधि खुद जांच में मदद करेंगे. लेकिन कल तक जो अधिकारी एक प्रतिनिधि के प्रिय थे. अचानक वे दुश्मन क्यों हो गये. कहीं न कहीं यह टेंडर व कमीशन का लोभ है. मौके पर गुमला नगर परिषद के एक दर्जन वार्ड पार्षद तालाबंदी में शामिल थे. तालाबंदी के बाद सभी प्रतिनिधि गेट के पास सुबह से शाम तक बैठे रहे. मौके पर पार्षद मोसर्रत परवीन, प्रवीण टोप्पो, संगियस तिर्की, नेहा लकड़ा, शैल मिश्रा, नूतन रानी, विजेता मिंज, उमा देवी, संजय कुजूर सहित कई लोग थे.

विधायक के पक्ष में उतरा पार्षद

एक तरफ जहां गुमला शहर का विकास रोके जाने से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व कई पार्षदों ने आंदोलन शुरू कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ वार्ड नंबर 22 के पार्षद मनीष कुमार ने इस आंदोलन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. श्री कुमार ने कहा है कि नगर परिषद में गड़बड़ी को लेकर वार्ड पार्षदों द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया. नारे लगाये गये. लेकिन जैसे ही विधायक भूषण तिर्की द्वारा नगर परिषद में गड़बड़ी की जांच के लिए उपायुक्त को पत्र प्रेषित किया गया. वैसे ही कुछ वार्ड पार्षदों ने गिरगिट की तरह रंग बदल लिया. यह बहुत ही चिंता का विषय है. यदि गड़बड़ी की जांच की मांग की गयी तो वार्ड सदस्यों को विधायक का साथ देना चाहिए. लेकिन इसका विरोध करने वाले क्या जताना चाहते हैं. यह सोचनीय विषय है. उन्होंने कहा है कि सरकारी कार्यालय का तालाबंदी किया जाना किसी भी तरह से संवैधानिक नहीं है. यदि यह कार्य जनता करता तो क्या प्रशासन मूक बना रहता. ऐसा कर जनता के साथ अन्याय किया जा रहा है. इससे आम जनता को ही परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

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