निशा भगत की मौत से सदमे में परिवार, पिता बोले- चारों ओर से परेशान की जा रही थी बेटी
आदिवासी अधिकारों और सरना धर्म के मुद्दों पर बेबाकी से अपनी आवाज बुलंद करने वाली निशा भगत की आत्महत्या की खबर ने उनके परिजनों और परिचितों को झकझोर कर रख दिया है. निशा की मौत की खबर परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी. जिस बेटी को परिजन हिम्मती और हर परिस्थिति से लड़ने वाली मानते थे, उसके इस तरह दुनिया से चले जाने की खबर पर पिता और मां फूट-फूटकर रो पड़े. आत्महत्या से पहले निशा के फेसबुक लाइव का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें वह जमीन माफिया के खिलाफ अपनी लड़ाई और कथित तौर पर सिस्टम की ओर से मिल रही परेशानियों का जिक्र करती नजर आ रही हैं.
निशा भगत मूल रूप से गुमला जिले के बारडीह पंचायत अंतर्गत उरु बारडीह गांव की रहने वाली थीं. वर्तमान में उनका परिवार शहर के पालकोट रोड और डीएसपी रोड इलाके में मकान बनाकर रह रहा है. निशा की मौत की जानकारी उनके परिजनों को खुद नहीं थी. सदर थाना की पुलिस ने उनके पिता हन्दू भगत और मां देविका भगत को फोन कर घटना की सूचना दी. सूचना मिलते ही दोनों बदहवास हो गए और रोने लगे. इसके बाद वे रांची के लिए रवाना हो गए. घर पर उनका बड़ा बेटा अभिषेक भगत मौजूद था. मोहल्ले के लोगों को भी निशा की मौत की जानकारी नहीं थी. मीडिया के पहुंचने के बाद आसपास के लोगों को घटना का पता चला. गुरुवार रात पिता से हुई थी आखिरी बातचीत निशा के पिता हन्दू भगत ने बताया कि गुरुवार की रात बेटी से उनकी बातचीत हुई थी. शुक्रवार को भी वे लगातार बेटी को फोन कर रहे थे, लेकिन उसने कॉल रिसीव नहीं किया. उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि बेटी के साथ कोई अनहोनी हो गई है. कुछ घंटे बाद पुलिस ने फोन कर निशा के आत्महत्या करने की सूचना दी.
पिता ने कहा कि उनकी बेटी बेहद हिम्मती थी. वह किसी के सामने आसानी से झुकने वाली नहीं थी. वह एक बड़े स्तर पर लड़ाई लड़ रही थी. उनके अनुसार, इस लड़ाई के कारण बेटी को चारों तरफ से परेशान किया जा रहा था. शासन-प्रशासन और माफिया तक उसके पीछे पड़े हुए थे. चार माह पहले पिठौरिया स्थित आवास में हुई थी डकैती पिता हन्दू भगत ने बताया कि करीब चार माह पहले पिठौरिया स्थित निशा के आवास में डकैती की घटना हुई थी. अपराधी घर से सामान के साथ सीसीटीवी कैमरे समेत अन्य चीजें भी ले गए थे. पिता का आरोप है कि इस घटना के बाद पुलिस की ओर से निशा को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा था. पिठौरिया थाना के पदाधिकारी अनिल कुमार दास से भी मदद नहीं मिलने की बात निशा अपने पिता को बताती थी. पिता ने बेटी की मौत के पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया है. हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. शिक्षा के क्षेत्र में भी हासिल की थी कई उपलब्धियां निशा भगत पढ़ाई-लिखाई में भी आगे रही थीं. उन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई उर्सुलाइन कॉन्वेंट से की थी. इसके बाद कार्तिक उरांव कॉलेज से इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई पूरी की.
उन्होंने दुर्गापुर से होटल मैनेजमेंट तथा नालंदा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा हासिल की थी. आदिवासी अधिकारों और सरना धर्म से जुड़े मुद्दों पर वह लगातार मुखर रहती थीं. पिछले वर्ष सरना धर्म के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अपना सिर भी मुंडवा लिया था. पिता ने कहा पिता हन्दू भगत ने कहा कि फिलहाल निशा के फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों, पिता की ओर से जताई गई आशंकाओं और पिठौरिया में हुई डकैती की घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. पुलिस जांच के बाद ही आत्महत्या के कारणों और किसी संभावित साजिश के आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.
