गुमला : 27% आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग को लेकर ओबीसी का प्रदर्शन
पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति झारखंड के आह्वान पर ओबीसी बंद और मशाल जुलूस के बाद बुधवार को स्थानीय कचहरी परिसर में ओबीसी मोर्चा ने धरना-प्रदर्शन किया. इस दौरान दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के पिछड़ा वर्ग को नौकरी, राजनीति और पेसा कानून में उचित अधिकार देने के साथ सभी जिलों में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की गयी. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र भी सौंपा.
पांच जिलों में अधिकारों से वंचित होने का आरोप : धरना को संबोधित करते हुए समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उदासन नाग ने कहा कि गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, खूंटी और रांची में पिछड़ा वर्ग लंबे समय से अपने अधिकारों से वंचित है. खेती-बारी, मजदूरी और छोटे रोजगार पर निर्भर परिवारों के बच्चों को शिक्षा के बाद भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं. सरकार को सभी जिलों में ओबीसी के लिए समान रूप से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए.
आबादी के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी की मांग : केंद्रीय महासचिव दिलीप नाथ साहू ने कहा कि ओबीसी को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय आबादी के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए. पंचायत से नगर निकाय और विधानसभा व लोकसभा तक पिछड़ा वर्ग की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है. उन्होंने आगामी जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग की.
पेसा कानून में भी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग : कोषाध्यक्ष शिवदयाल गोप ने कहा कि दक्षिणी छोटानागपुर के कई जिलों में नौकरी में ओबीसी आरक्षण शून्य होने से पिछड़े परिवारों के युवाओं के लिए सरकारी रोजगार के अवसर सीमित हैं. उन्होंने सभी जिलों में 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ पेसा कानून में भी ओबीसी की आबादी के अनुरूप भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की.
महासचिव बाबूलाल साहू ने कहा कि बंद और मशाल जुलूस के बाद धरना आंदोलन की अगली कड़ी है. करौंदी की अंजना साहू ने कहा कि जातिगत जनगणना से विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक आबादी सामने आयेगी. मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गयी. धरना में काफी संख्या में ओबीसी समाज के लोग शामिल हुए. इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की गयी.
