गुमला

108 पर डेढ़ घंटे तक फोन, फिर भी नहीं पहुंची एंबुलेंस; सड़क पर तड़पते रहे दो युवक

गुमला के रायडीह थाना क्षेत्र के करमघाट के समीप सोमवार को एक सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों की पहचान अतीश कुजूर (22), पिता पवन कुजूर और सागर कुजूर (19), पिता दिपरंजन कुजूर, दोनों ग्राम सुरसांग चिरोडांड़ निवासी के रूप में हुई है. हादसे के बाद स्थानीय लोगों और पत्रकारों की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायडीह पहुंचाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया. जानकारी के अनुसार, अतीश कुजूर और सागर कुजूर एक ही मोटरसाइकिल से रायडीह साप्ताहिक हाट बाजार आए थे. बाजार से खरीदारी कर दोनों वापस अपने गांव लौट रहे थे. इसी दौरान करमघाट के समीप मोटरसाइकिल अनियंत्रित हो गई और दोनों बीच सड़क पर गिर पड़े। हादसे में दोनों को गंभीर चोटें आईं.

डेढ़ घंटे तक 108 पर फोन, फिर भी नहीं पहुंची एंबुलेंस

हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने घायलों की जान बचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा को फोन कर मदद मांगी. आरोप है कि करीब डेढ़ घंटे तक लगातार फोन करने के बावजूद न तो कॉल रिसीव किया गया और न ही घटनास्थल पर एंबुलेंस पहुंची. एंबुलेंस के इंतजार में समय बीतता देख स्थानीय लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए मोटरसाइकिल की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायडीह पहुंचाया. अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद जब दोनों को सदर अस्पताल गुमला रेफर किया गया, तब परिजनों ने दोबारा 108 एंबुलेंस को फोन कर बुलाने का प्रयास किया. लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंची. घायलों की बिगड़ती स्थिति और एंबुलेंस के इंतजार में हो रही देरी को देखते हुए आखिरकार परिजनों ने निजी वाहन बुक किया और दोनों घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला ले गए.

रायडीह की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

इस घटना ने रायडीह प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, रायडीह में 108 एंबुलेंस समेत कुल तीन एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से कोई भी वर्तमान में प्रभावी रूप से मरीजों के काम नहीं आ रही है. बताया जा रहा है कि एक एंबुलेंस टायर के अभाव में खड़ी है, जबकि दूसरी इंजन में खराबी के कारण बंद पड़ी है. वहीं तीसरी 108 एंबुलेंस किस कारण से सेवा से बाहर है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब सरकारी एंबुलेंस सेवा आखिर कहां रहती है? क्या किसी मरीज की जान जाने के बाद ही स्वास्थ्य विभाग की नींद खुलेगी? रायडीह की जनता के लिए एंबुलेंस जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा का इस तरह ठप रहना गंभीर चिंता का विषय है. ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मामले की तत्काल जांच कराने, खराब पड़ी एंबुलेंस को अविलंब दुरुस्त कराने तथा 108 सेवा को नियमित और जवाबदेह बनाने की मांग की है.

ग्रामीणों ने क्या कहा

ग्रामीणों का कहना है कि रायडीह की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था में आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जिंदगी सरकारी व्यवस्था के भरोसे नहीं, बल्कि किस्मत और स्थानीय लोगों की मदद के भरोसे रह गई है.

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