गुमला

Video : कुदरत का बेशकीमती तोहफा ‘सदनी घाघ’, बस प्रशासन की थोड़ी पहल से देशभर में चमकेगा नाम

(चैनपुर से अंकित कुमार पासवान की रिपोर्ट)
चैनपुर (गुमला): गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड की जनावल (राजाडेरा) पंचायत में स्थित सदनी घाघ जलप्रपात सालों से प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का दंश झेल रहा है. प्रकृति ने यहां अपना सर्वस्व लुटाया है, लेकिन व्यवस्था की सुस्ती के कारण कुदरत का यह अनमोल तोहफा आज गुमनामी के अंधेरे में खोने को मजबूर है. 200 फीट की ऊंचाई से गिरती शंख नदी की यह मनमोहक धारा चीख-चीख कर व्यवस्था से अपने विकास की गुहार लगा रही है, लेकिन जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है.

बताते चले कि सदनी घाघ जलप्रपात में राज्य के बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की पूरी क्षमता है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. मुख्य मार्ग से वाटरफॉल तक पहुँचने का रास्ता बेहद जर्जर और पथरीला है, जिसे दुरुस्त करना बेहद जरूरी है.

अगर सुधरे हालात, तो रुकेगा आदिवासी युवाओं का महानगरों की ओर पलायन

जनावल पंचायत से हर साल सैकड़ों आदिवासी युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई और ईंट-भट्टों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं. अपनी ही माटी में रोजगार न मिलने का यह दर्द तब और बढ़ जाता है, जब गांव की ही चौखट पर ‘सदनी घाघ’ जैसा कुदरत का नायाब खजाना मौजूद है. स्थानीय ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर सरकार इस जलप्रपात को एक बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दे, तो हमारे बच्चों को अपनी जमीन छोड़कर दो वक्त की रोटी के लिए दूसरे राज्यों में दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी.

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