‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ से गुमला में रेशम उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को किया गया जागरूक
केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) द्वारा संचालित एमआरएमए 2.0 (मेरा रेशम, मेरा अभिमान) योजना के तहत झारखंड सरकार के हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प विभाग के सहयोग से गुमला जिले में ग्रामीणों को रेशम उत्पादन से जुड़कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया. इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पारंपरिक रबी और खरीफ फसलों के साथ रेशम उत्पादन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है. इसके माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार के अवसर सृजित करने तथा रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन को कम करने का प्रयास किया जा रहा है.
साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और राज्य एवं देश के आर्थिक विकास में योगदान देने का लक्ष्य है. इसी क्रम में अग्र परियोजना केंद्र गुमला के परियोजना पदाधिकारी ललन कुमार रजक के दिशा-निर्देशन में विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम में झारखंड सरकार के रेशम तकनीकी कर्मी मनीष कुमार एवं कालीचरण सावैयां तथा केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ कमलेश वर्मा ग्रामीणों और किसानों को मलबरी आधारित रेशम उत्पादन की जानकारी दिये.
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को मलबरी पौधारोपण, रेशम कीटपालन तथा रेशम उत्पादन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है. किसानों को रेशम उत्पादन से मिलने वाले स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसरों की जानकारी देते हुए स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर इसे कृषि की सहायक गतिविधि के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.=एमआरएमए 2.0 के माध्यम से जिले में मलबरी आधारित रेशम उत्पादन का विस्तार होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होने तथा परिवारों की आय में वृद्धि की उम्मीद है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराकर पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है. ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ ग्रामीणों के लिए रेशम उत्पादन को आय, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है.
