गुमला

15 कॉल, एक भी जवाब नहीं, ‘108’ खामोश रही और रुक गयी शांति देवी की सांस

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर सामने आयी है. बसिया प्रखंड के पतुरा पाहड़ टोली गांव की 32 वर्षीय शांति देवी की मौत ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. जानकारी के अनुसार गुरुवार को घर में भतीजी की शादी की तैयारियां चल रही थीं. इसी दौरान किसी कारणवश शांति देवी ने घर में रखे चूहा मारने वाला कीटनाशक खा लिया. परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें शाम करीब 4.00 बजे रेफरल अस्पताल बसिया पहुंचाया. जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए गुमला सदर अस्पताल रेफर कर दिया.

‘108’ सेवा बनी मूकदर्शक

बसिया अस्पताल से गुमला तक पहुंचने की जद्दोजहद में स्वास्थ्य व्यवस्था की असल तस्वीर सामने आयी. परिजनों का आरोप है कि ‘108 एंबुलेंस सेवा’ को करीब 15 बार कॉल किया गया. लेकिन एक भी कॉल रिसीव नहीं हुआ. हैरानी की बात यह है कि एंबुलेंस अस्पताल परिसर में ही खड़ी थी. लेकिन चालक का कहीं पता नहीं था. अस्पताल के नर्स और कर्मचारियों ने भी कई बार संपर्क करने की कोशिश की. पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

मजबूरी में निजी वाहन का सहारा

समय तेजी से निकलता देख परिजनों ने मजबूर होकर 2500 रुपये खर्च कर निजी वाहन की व्यवस्था की और शांति देवी को सदर अस्पताल गुमला पहुंचाया. सदर अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ. हालत गंभीर देखते हुए शुक्रवार तड़के करीब 3.00 बजे उन्हें रांची स्थित रिम्स रेफर किया गया. लेकिन दुर्भाग्य और व्यवस्था की विफलता ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा. रिम्स ले जाने की तैयारी के दौरान ही अस्पताल परिसर में शांति देवी ने दम तोड़ दिया.

परिजनों में आक्रोश

घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश है. उनका कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती, तो शांति देवी की जान बच सकती थी. उन्होंने जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग की है.

सिस्टम पर बड़ा सवाल

सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बताने के दावे करती रहे. लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है. एक आपातकालीन कॉल का जवाब न मिलना भी किसी की जान पर भारी पड़ सकता है. शांति देवी की मौत अब सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक आईना बन गयी है.

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