राजनीति

परिसीमन में आदिवासी सीटें घटाने की कोशिश पर भड़के बंधु तिर्की

गुमला स्थानीय परिषदन में सोमवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन झारखंड के आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को समय रहते एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करनी होगी. इसी उद्देश्य से 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की जाएगी.

बंधु तिर्की ने कहा कि वर्ष 2002-08 की परिसीमन प्रक्रिया के दौरान झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों को 28 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव आया था. आदिवासी समाज, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बाद झारखंड की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए इसे लागू नहीं किया गया. अब दोबारा परिसीमन की प्रक्रिया प्रस्तावित है, इसलिए आदिवासी समाज को पहले से सजग रहना होगा.

उन्होंने कहा कि देश के विकास की सबसे बड़ी कीमत आदिवासी समाज ने चुकाई है. खनन, इस्पात संयंत्र, बांध, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और बिजली परियोजनाओं के लिए लाखों आदिवासी जल, जंगल और जमीन से विस्थापित हुए. रोजगार की तलाश में बड़े पैमाने पर पलायन भी हुआ. ऐसे समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम करना न्याय और सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ होगा. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों का भी पालन किया है. इसलिए केवल वर्तमान जनसंख्या को आधार बनाकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम करना उचित नहीं होगा. झारखंड के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों, ऐतिहासिक विस्थापन, पलायन, आदिवासी बहुल क्षेत्रों तथा सीएनटी-एसपीटी एक्ट जैसे संवैधानिक व कानूनी संरक्षणों को परिसीमन में ध्यान में रखना चाहिए.

बंधु तिर्की ने स्पष्ट कहा कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों में किसी भी प्रकार की कमी स्वीकार नहीं होगी. यदि कुल सीटों में वृद्धि होती है तो एसटी आरक्षित सीटों में भी उसी अनुपात में वृद्धि होनी चाहिए. परिसीमन से पहले आदिवासी समाज, जनप्रतिनिधियों, संवैधानिक विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से व्यापक परामर्श की भी उन्होंने मांग की.

छात्रों का आंदोलन जायज, भाजपा कर रही राजनीति

छात्र आंदोलन पर बंधु तिर्की ने कहा कि छात्रों का आंदोलन जायज है, लेकिन इसमें भाजपा राजनीति कर रही है. उन्होंने दावा किया कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मानी जा चुकी हैं. राज्य में सीआईडी जांच कर रही है और कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. सीबीआई जांच की मांग पर उन्होंने कहा कि सीबीआई पहले भी कई मामलों की जांच कर चुकी है, लेकिन कई मामलों में अब तक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई है.

सीजीएल मामले पर उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर नियुक्ति पत्र दिया गया है. इसके बावजूद सरकार न्यायिक जांच कराने की दिशा में विचार-विमर्श कर रही है. उन्होंने आदिवासी समाज से 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान पहुंचने की अपील करते हुए कहा, “एकता हमारी शक्ति है, संविधान हमारी ढाल है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व हमारा अधिकार है।प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से अनिल एडवर्ड पन्ना उपस्थित थे.

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